खंडवा। ओंकारेश्वर बांध में बिना पुनर्वास लाई जा रही डूब के खिलाफ डूब प्रभावितों का जल सत्याग्रह दूसरे दिन भी जारी है। आंदोलन के प्रमुख आलोक अग्रवाल ने ग्राम घोघलगांव, टोकी, एखण्ड, कामनखेड़ा आदि ग्रामों के 450 परिवारों के साथ जल सत्याग्रह शुरू किया है। डूब प्रभावित अपनी मांगों को लेकर कमर तक पानी में खड़े होकर सत्याग्रह कर रहे हैं।
जल सत्याग्रह खण्डवा जिले के कामनखेड़ा में किया जा रहा है। जल सत्याग्रह के दूसरे दिन महिलाएं भी धरने पर बैठी है। यहां के रहवासियों ने काली दीवाली मनाने का फैसला किया है।
विस्थापितों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पुनर्वास पूरा होने के बाद ही ओंकारेश्वर बांध में जल स्तर को बढ़ाया जाए, लेकिन बिना पुनर्वास बांध में लायी जा रही डूब पूर्णतः गैर कानूनी, असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण है। विस्थापितों की मांग है कि पानी का स्तर वापस पूर्व के स्तर 193 मीटर पर लाया जाए और विस्थापितों के सम्पूर्ण पुनर्वास के बाद ही बांध में पानी भरा जाये।
दरअसल ओंकारेश्वर बांध में 193 मीटर तक पानी भरा हुआ है जिसे ओंकारेश्वर विद्युत परियोजना के लिये धीरे-धीरे भरकर जलस्तर 196.60 मीटर तक भरा जा रहा है। अगर बांध का जलस्तर 196.60 मीटर तक पहुँच गया तो धाराजी क्षेत्र की 284 हेक्टेयर जमीन टापू में तब्दील हो जाएगी।
गत 21 अक्टूबर से ओंकारेश्वर बांध में जलस्तर बढ़ते हुए 1 मीटर से ज्यादा पानी बढ़ा दिया गया है। इस कारण कई गांवों के रास्ते कट गए हैं। कई परिवार और सैकड़ों एकड़ जमीन टापू बन गयी है। ग्राम घोघलगाव के परिवार बिजली काटने के कारण अंधेरे में रह रहे हैं। खेतों और गांवों के बीच का रास्ता डूब गया, इस कारण किसान अपने खेतों में भी नहीं जा पा रहे है।
जल सत्याग्रह की तैयारियों को लेकर आंदोलन के प्रमुख आलोक अग्रवाल का कहना है कि बिजली परियोजना से होने वाले प्रभावित बिना पुनर्वास अंधेरे में रह रहे हैं। यह उन लोगों के आदेश पर हो रहा है जो एक घंटा बिना बिजली के नहीं रह सकते हैं।
