बैतूल। आमतौर पर 60 से 70 वर्ष की उम्र में ही इंसान बिस्तर पकड़ लेता है। चलने-फिरने और देखने में समस्या आने लगती है। लेकिन एक शख्स ऐसा भी है जिसने नियमित योगाभ्यास से 100 वर्ष की उम्र में भी अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त और सेहतमंद रखा है। यह शख्स 100 वर्ष की उम्र में भी न सिर्फ बिना चश्मे के अखबार का वाचन कर लेता है बल्कि बिना किसी सहारे के दो से चार किलोमीटर पैदल सफर कर लेता है।
बैतूल जिले के सोहागपुर गाव में रहने वाले 100 वर्षीय प्यारेलाल वर्मा ने अपनी नियमित दिनचर्या से शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखा है। इस उम्र में भी वह रोजाना सुबह चार से पांच बजे के बीच उठकर नित्यकर्म निभाने के बाद पैदल टहलने निकल जाते है। टहलने की बाद प्यारेलाल योग्याभ्यास करते हैं। उनकी यह दिनचर्या वर्षों से चली आ रही है। अपनी दिनचर्या के कारण ही प्यारेलाल अपनी छह पीढ़ियों के परिजनों के बीच सकुशल नजर आ रहे है।
30 अक्टूबर को ही प्यारेलाल ने अपने जीवन के 100 वर्ष पूर्ण किए है। उनके जन्मदिन पर पूरे परिवार ने उनका मुंह मीठा कर खुशियाँ मनाई। अपनी आंखों के सामने छह पीढ़ियों को देख चुके प्यारेलाल वर्मा का जन्म 30 अक्टूबर 1919 को हुआ था। उनके जीवन का सफर बहुत ही संयमित रहा। यही कारण है कि उम्र के इस पड़ाव में भी उन्हें ना तो लाठी की जरूरत पड़ी और ना ही चश्मे की।
रोज सुबह 4 बजे जागना टहलना फिर नहाकर अखबार पढ़ना और फिर 10 से 11 बजे के बीच खाना। खेत के कामकाज निपटाकर फिर शाम को 8 से 9 के बीच खाना खाकर 10 बजे के पहले सो जाना यही उनकी दिनचर्या रही है। हालाँकि अब वह खेत तो नही जाते है लेकिन घर के आंगन में टहलना नही भूलते।
प्यारेलाल वर्मा के परिवार वाले बताते है कि जब से वे उन्हें देख रहे है उनकी दिनचर्या बहुत ही संयमित रही है। बाहर का खाना खाने की बात तो दूर उन्होंने कभी होटल का पानी तक नहीं पिया और पिया भी तो हैंड पंप या कुएँ का ही पानी पिया। वे आज भी हर प्रकार की सब्जी खाने में खाते है। परिवार के सदस्यों के मुताबिक उन्होंने कभी उन्हें बीमार होते भी नही देखा। उनके 100वें जन्मदिन को मनाते वक्त उनकी 5 पीढ़ियों के सदस्य उत्साह से भरे नजर आए।
