धार। आज से 63 साल पहले आज के ही दिन देश के बीचोंबीच होने से इस प्रदेश का नाम मध्य प्रदेश रखा गया था। लेकिन यह जानना रोचक है कि इसी मध्य प्रदेश में एक चलता-फिरता मध्य प्रदेश भी है। दरअसल प्रदेश का एक शख्स ऐसा है जिसका नाम है मध्यप्रदेश सिंह। ख़ास बात यह है कि इस शख्स ने अपने तीन माह के बेटे का नाम रखा है भोपाल सिंह।
मध्यप्रदेश सिंह नाम का यह शख्स धार जिले की मनावर तहसील के गांव भमोरी का रहने वाला है। वे फिलहाल झाबुआ के पीजी कॉलेज में भूगोल पढ़ाते हैं। मध्यप्रदेश सिंह जब किसी को पहली बार अपना नाम बताते हैं तो चौंक जाते हैं। कुछ लोग उनकी बात पर यकीन भी नहीं करते हैं। जब मध्यप्रदेश सिंह अपना आधार कार्ड या आईडेन्टिटी कार्ड दिखाते है तब जाकर लोगों को यकीन होता है।
मध्यप्रदेश सिंह ने बताया कि वे नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे है। उनके जन्म के समय उनके बड़े भैया ने उनका नाम कुछ अलग रखने की जिद की थी। इसी से उनका यह नाम रख दिया गया। आठवीं और दसवीं तक तो वे अपने नाम का अर्थ ही नहीं समझते थे। वे झाबुआ के पीजी कॉलेज में पढ़ा रहे हैं, वे एमफिल कर चुके हैं और पीएचडी भी कर रहे हैं।
उनकी पत्नी किरण को उनके नाम पर गर्व है। वह कहती है कि बड़ा ही यूनिक नाम है। पहली बार कुछ अजीब लगा था लेकिन जब उनसे हर कोई मिलना चाहता है बात करना चाहता है तो अच्छा लगता है। कभी कोई परेशानी नहीं हुई इस नाम से। वहीं मध्यप्रदेश सिंह को अपने इस नाम पर गर्व है। मध्यप्रदेश सिंह का पूरा नाम मध्यप्रदेश सिंह अमलावर है। वे बताती है कि जैसे भारत का ह्रदय स्थल मध्यप्रदेश है, वैसे ही नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे उनके पति अपने भाई बहनों के ह्रदय में रहते है। यह अपने प्रदेश के प्रति मध्यप्रदेश की दीवानगी ही है कि मध्यप्रदेश सिंह ने अपने बेटे का नाम भोपालसिंह रखा है जो कि अभी मात्र 3 माह का है।
