खंडवा। ओंकारेश्वर बाँध में पूर्ण जलभराव और बग़ैर पुनर्वास डूब के विरोध में जारी जल सत्याग्रह आठवें दिन भी जारी है। लगातार पानी में रहने के कारण सत्याग्रहियों का स्वास्थ्य प्रभावित होने लगा है। पानी में खड़े रहने से उनके पैरों की चमड़ी गलने लगी है। उनके शरीर में दर्द और खुजली सहित कई तरह की समस्या हो रही है। बावजूद इसके सत्याग्रहियों का कहना है कि जब तक बाँध प्रभावितों को सभी अधिकार नहीं दिए जाते तब तक उनका जल सत्याग्रह जारी रहेगा।
पानी, बिजली की व्यवस्था ठप हुई
प्रशासन ने डूब प्रभावित घोघलगाँव के बाद अब एखंड गाँव की बिजली भी काट दी है। एखंड में विस्थापितों का पुनर्वास होना अभी बाकी है। आन्दोलन के प्रमुख अलोक अग्रवाल ने प्रशासन के इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि अपना सब कुछ त्याग करने वाले प्रभावितों के जीवन और घर में अँधेरा किया जा रहा है।
टापू बने गाँव
नर्मदा बचाओ आन्दोलन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि ओंकारेश्वर बाँध में पानी बढ़ने के कारण गाँव और घरों में पानी भर रहा है। गाँव के रास्ते कट गए है और सैकड़ों एकड़ जमीन टापू बन गई है।
सत्याग्रहियों की मांगे
बांध का जलस्तर 196.60 मीटर तक पहुँच गया तो धाराजी क्षेत्र की 284 हेक्टेयर जमीन टापू में तब्दील हो जाएगी। विस्थापितों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पुनर्वास पूरा होने के बाद ही ओंकारेश्वर बांध में जल स्तर को बढ़ाया जाए, लेकिन बिना पुनर्वास बांध में लायी जा रही डूब पूर्णतः गैर कानूनी, असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण है। विस्थापितों की मांग है कि पानी का स्तर वापस पूर्व के स्तर 193 मीटर पर लाया जाए और विस्थापितों के सम्पूर्ण पुनर्वास के बाद ही बांध में पानी भरा जाये।
