नरसिंहपुर। सोशल मीडिया और डिजिटलाइजेशन के दौर में भी एक स्कूल छात्र-छात्राओं को रेडियो से स्वच्छता और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दे रहा है। इससे बच्चे न केवल प्रभावित हो रहे हैं बल्कि उन संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात भी कर रहे हैं।
नरसिंहपुर के बीटीआई स्कूल में स्कूली छात्र-छात्राओं को परंपरागत संचार के साधन रेडियो के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। बच्चे भी न सिर्फ स्वच्छता को जीवन में अपना रहे है बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा के स्रोत बन रहे हैं। आकाशवाणी के कार्यक्रम स्वर तरंग, मीना की दुनिया एवं स्वच्छता के संदेश से प्रभावित होकर स्कूली बच्चे स्वच्छता का पाठ बड़ी ही दिलचस्पी से सीख रहे है।
बीटीआई स्कूल के अध्यापकों ने बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए यह अभिनव पहल शुरू की है। बच्चों को रेडियो पर आने वाले स्वच्छता के विभिन्न कार्यक्रम और संदेशों को सुनाया जाता है। इससे बच्चों के मन में स्वच्छता के महत्व का भाव जागृत हो रहा है।
स्कूल के छात्रों का कहना है कि हमें रोजाना रेडियो पर स्वच्छता के संदेश और स्वच्छता के उपायों पर आधारित प्रसारण को सुनाया जाता है। इससे हमें स्वच्छ रहने और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के उपाय सुझाए जाते है। चाहे स्कूल हो, घर हो या गलियां सभी को स्वच्छ रखना चाहिए। खाना खाते समय, शौच जाते समय हाथों को अच्छे धोना चाहिए।
इससे प्रभावित होकर हम रोजाना स्कूल में कुछ समय बगीचे को स्वच्छ रखने के लिए श्रमदान करते है। स्कूल में अलग से हाथ धोने के लिए हाथ धुलाई यूनिट भी बनाया गया है। पटल पर स्वच्छता के मानक स्तरों को भी दर्शाया गया है। इससे हमें काफी कुछ सीखने को मिलता है। इसे हम अपने जीवन में अपना भी रहे हैं।
रेडियो में प्रसारित इन संदेशों का बच्चों के कोमल मन पर स्थाई प्रभाव भी पड़ता नजर आ रहा है। वह स्वच्छता को ना केवल अपना रहे हैं बल्कि दूसरों को भी जागरूक करने स्कूल में हस्त निर्मित ग्राइंग पेंटिग इत्यादि को बनाकर बोर्ड पर अंकित भी कर रहे है। जिससे दूसरे स्कूली बच्चे भी स्वच्छता के महत्व को समझ सकें।
स्कूल के प्रधान पाठक भी मानते हैं कि स्वच्छता के प्रति छात्रों को जागरूक करना जरूरी है। बच्चों में संक्रमण बहुत जल्दी प्रभाव डालता है और 70% बीमारियां हाथों में गंदगी से ही होती हैं। जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता को लेकर जागरूकता की मुहिम चला रहे हैं तो ऐसे में हमने भी बच्चों को रेडियो में आने वाले स्वच्छता के संदेशों और उससे जुड़े कार्यक्रमों को सुनना शुरू किया। इस संवाद के माध्यम से बच्चे जागरुक भी हो रहे हैं और स्वच्छता के प्रति उनका नजरिया भी बदल रहा है। हम रेडियो के प्रसारण के संवाद को बाल सभा के रूप में भी बच्चों को समझाते हैं जिससे बच्चे आसानी से समझ जाते हैं और उसका अनुसरण करने लगते हैं। संचार का यह माध्यम बच्चों के लिए बेहद प्रभावी साबित हो रहा है और बच्चे स्वच्छता के प्रति जागरूक तो हो ही रहे हैं साथ ही दूसरों को भी जागरूक करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
