इंदौर। एक छोटी सी बच्ची ने समाज में बड़े बदलाव की मुहिम शुरू की है।खिलौनों से खेलने की उम्र में यह बच्ची लोगों से बीड़ी- सिगरेट छोड़ने की गुहार कर रही है। बीते दस सालों में उसने कई लोगों को इसके खतरों से आगाह करते हुए उनसे धूम्रपान की आदत को छुड़वाया है।
पाँच साल की उम्र में दिशा को पहली बार पता चला था कि उनके दादाजी धूम्रपान करने के कारण हुई बीमारी से अब इस दुनिया में नहीं है। उसने माँ से पूछा कि धूम्रपान इतनी ख़राब चीज है तो दादाजी ने इसे छोड़ा क्यों नहीं? इस पर माँ ने बताया कि, ‘किसी ने समझाया नहीं।’ माँ की इस बात का दिशा पर इतना गहरा असर हुआ कि वह लोगों का धूम्रपान छुड़ाकर उनकी जिन्दगी को नई दिशा देने के लिए निकल पड़ी।
पिछले दस सालों में दिशा लगभग 20 हजार लोगों को धूम्रपान से आजाद करवा चुकी है। यह अनूठी कहानी है इंदौर में रहने वाली दिशा तिवारी की। वह राह चलते जब किसी को धूम्रपान करने हुए देखती है तो तुरंत उसके पास जाकर अपने दादा की कहानी सुनाती है कि कैसे धूम्रपान से उनकी जान चली गयी। नन्ही दिशा अपनी मासूम बातों से धूम्रपान करने वाले को मनाकर ही दम लेती है। वह सिर्फ धूम्रपान त्यागने का वादा ही नहीं लेती बल्कि उसका नाम, नंबर और पता भी अपनी डायरी में दर्ज कर लेती है।
दिशा उनसे डायरी में लिखवाती है कि वह आज के बाद कभी भी धूम्रपान नहीं करेंगे। इसके बाद साल में दो – तीन बार उनसे फ़ोन करके पूछती है कि ‘अंकल आपने फिर से तो धूम्रपान शुरू नहीं किया न।’
दिशा के इस काम में माँ संगीता तिवारी, पिता अश्विनी तिवारी और छोटा भाई उसकी हर कदम पर मदद करते है। दिशा की माँ कहती है कि हम पहले डरते थे कि दिशा जिस तरह अंजान लोगों के बीच जाकर उन्हें सिगरेट छोड़ने का कहती है तो कोई कुछ कह न दे। लेकिन जब लोग उसकी इस पहल की सराहना करने लगे और उसके कहने पर धूम्रपान छोड़ने लगे तो उसके साथ हमें भी काफी ख़ुशी हुई। इससे उसका आत्मविश्वास भी बढ़ा। हमने भी उसकी इस पहल में पूरा साथ दिया और नशे से मुक्ति दिलाने के कई आयोजन भी किए जिससे लोगों के बीच अच्छा संदेश पहुँचे और वह धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जान सके।
दिशा के पिता अश्विनी तिवारी ने भी अपनी बेटी के कार्यो की सराहना की है। उनका कहना है कि यह मुहिम समाज के हित के लिए एक अच्छी पहल है। मुझे अपनी बेटी पर गर्व है कि इतनी कम उम्र में उसने जो इतनी बड़ी मुहिम चलाई है, वह वाकई काबिले तारीफ है। इसके लिए उसे अवार्ड से सम्मानित भी किया गया है।
अब वे लोग भी उसके काम को सराहते हैं, जिन्होंने उसके कहने पर धूम्रपान बंद किया है। दिशा के इस नि:स्वार्थ भाव से किए जा रहे कार्य की प्रशंसा उन लोगो के परिजन भी करते है जिनकी बुरी लत डॉक्टर के समझाने पर भी मरीज नही छोडता है। जो डॉक्टर की दवाई भी नही कर सकती दिशा वो काम कर रही है। इतनी कम उम्र में इतनी समझ और समाज के प्रति इस प्रकार के दृष्टिकोण की दिशा के स्कूल, पड़ोसी, दोस्त सभी तारीफ करते है।
