छिंदवाड़ा। प्रदेश का एक स्थान ऐसा भी है जहाँ हर साल भूतों का प्रसिद्ध मेला लगता है। मेले में प्रेत बाधा से ग्रसित व्यक्ति का उपचार तंत्र-मंत्र से उपचार किया जाता है। रात के समय यहाँ का नजारा रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है।
देश के कई हिस्सों में आज भी विज्ञान पर आस्था भारी है। छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव विधानसभा के गांव नवेगांव के ताल खमरा गांव हर साल प्रसिद्ध भूतों का मेला लगता है। देव उठनी ग्यारस के बाद लगने वाले कालरात्रि मेले में बड़ी संख्या में प्रेत बाधा से ग्रसित व्यक्ति पहुँचते हैं। मेले में मंत्रों से पीड़ित का उपचार किया जाता है।
मेले पहुँचने वाले प्रेत बाधा से ग्रसित व्यक्ति के हाव भाव डराने वाले होते है। खासकर रात के समय यहाँ का नजारा काफी डरावना होता है। तांत्रिक और ओझा इस मेले में शिरकत कर प्रेत बाधा का नाश करते नजर आते हैं।
मेले में तांत्रिक पीड़ित व्यक्ति से तालाब में डुबकी लगाते है। इसके बाद उसे वटवृक्ष ‘दईयत बाबा’ के समीप ले जाकर कच्चे धागा बाँधा जाता है। तांत्रिक पूजा के बाद पास में बने मालनमाई के मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है और व्यक्ति सामान्य हो जाता है।
यह मेला सदियों पुराना है। मेले में दूर दूर से आदिवासी ग्रामीणों के साथ अन्य समाज के लोग आते है और अपने परिजनों का उपचार कराते है। यहां पर जिले के अलावा अन्य जिले व प्रदेश से भी परेशान लोग आते है।
