डिंडोरी। शहद उत्पादन के लिए डिंडोरी बेहद उपयुक्त जगह साबित हो रही है। कई इलाकों से लोग यहाँ आकर शहद उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन के पीछे यहाँ का वातावरण और परागकणों की उपलब्धता है। स्थानीय किसान यदि इसकी उपयोगिता को समझ सकेंगे तो ना सिर्फ खेती में अच्छा मुनाफा होगा बल्कि शहद उत्पादन के लिए भी बड़े रास्ते खुल सकते हैं।
दरअसल डिंडोरी जिले में बड़े पैमाने पर रामतिल की खेती की जाती है। जिले में रामतिल के जैसी क्वालिटी वाली फसल दूसरे जिलों में कहीं नहीं होती। रामतिल की फसल एक ऐसी फसल है, जिससे मधुमक्खियां ज्यादा शहद बनाती है। अगर शासन-प्रशासन मधुमक्खी पालन को लेकर कोई योजना बनाए और किसानों को ट्रेनिंग दे तो किसान मौसमी फसलों से भी ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
बाजार में शहद और इसके उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण मधुमक्खी पालन एक लाभदायक और आकर्षक उद्यम के रूप में स्थापित हो चुका है। मधुमक्खी पालक इससे अच्छा मुनाफा कमाते है। ख़ास बात यह है कि हर साल बाहरी राज्यों के व्यापारी अपनी मधुमक्खियों को लेकर डिंडोरी आते हैं और रामतिल की फसल का लाभ लेते है जबकि यहाँ के किसान जागरूकता के आभाव में इसका लाभ लेने से वंचित है।
डिंडोरी जिले में पिछले पांच साल से अपनी मधुमक्खियां लाने वाले मुकेश शर्मा का कहना है कि अफसोस कि डिंडोरी के किसानों में मधुमक्खी पालन के प्रति जागरूकता नहीं है। रामतिल की फसल पर मधुमक्खियों के पालन का तरीका भी बेहद आसान है। रामतिल की फसल से मधुमक्खियां पराग निकालकर शहद बनाती है पर यहां के किसानों में जागरूकता नही है।
डिंडोरी में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं है। मधुमक्खी पालन का तरीका भी बेहद आसान है। अगर शासन-प्रशासन मधुमक्खी पालन को लेकर कार्य योजना बनाए और किसानों को इसकी ट्रेनिंग दे तो जिले के किसानों को फसलों के साथ अतिरिक्त लाभ होगा। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। कृषि विभाग भी अब मधुमक्खी पालन की कार्य योजना बना रही है।
