जबलपुर। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अयोध्या मामले को लेकर कहा कि कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर गिराया था। वहां मस्जिद होने के कोई प्रमाण नहीं है। मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन देना अनुचित है।
राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के संस्थापक और सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार शंकराचार्य सरस्वती ने तर्क देते हुए कहा कि वहां मस्जिद नाम की कोई चीज नहीं थी। वहां न बाबर का कुआं था न ही मस्जिद की मीनार थी। वह मंगल कलश, हनुमान प्रतिमा और गर्भगृह था। यह सब मंदिर की निशानी है। जो हिन्दुओं द्वारा तोड़ा गया वह मंदिर था। हिन्दुओं ने राम चबूतरा, सीता की रसोई हनुमान मूर्ति और वाराह मूर्ति तोड़ी है।
शंकराचार्य ने आगे कहा कि जब मस्जिद तोड़ी ही नहीं गई है तो फिर मस्जिद तोड़ने के नाम पर क्यों पक्षपात किया जा रहा है। क्यों 5 एकड़ भूमि दी जा रही है जबकि यह कारसेवकों की खुरापात थी।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में फैसला सुना दिया है। इस फैसले में कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को दिया है। जबकि मुस्लिम पक्ष यानी सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही दूसरी जगह पर 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है।
