नरसिंहपुर। प्रदेश के एक सरकारी कर्मचारी की विधवा पिछले दो सालों से अपने बच्चों के साथ सरकारी हुक्मरानों की चौखट पर एड़िया रगड़ रही है। बावजूद उसको अब तक उसका उसका वाजिब हक नहीं मिल पा रहा है। परिवार आर्थिक तंगी से जूझने पर मजबूर हैं। लेकिन प्रशासन के कानों पर जू तक नहीं रेंग रही है।
यह सरकारी तंत्र की बेरहमी ही है कि उसके ही मुलाजिमों का परिवार दो सालों से इंसाफ के लिए उसके दर पर खड़ा है, लेकिन उसे सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला। मामला नरसिंहपुर का है। यहाँ रहने वाले सहायक शिक्षक कन्हैया लाल मेहरा की ड्यूटी दो सालों पहले ओडीएफ अभियान में लगाई थी। इसके लिए शासकीय आदेश भी जारी हुआ था। 5 मई 2017 को ड्यूटी के दौरान हुई दुर्घटना में कन्हैया लाल की मौत हो गई थी।
कन्हैया लाल की मौत के बाद से ही उसका परिवार यतीमों की तरह जिन्दगी गुजर बसर करने को मजबूर है। इन्हें आज तक शासन से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। पूर्व शासकीय कर्मचारी कन्हैयालाल की विधवा अपने तीन मासूम बच्चों और माँ के साथ कई बार प्रशासन से मदद की गुहार लगा चुकी है, लेकिन प्रशासन हर बार उसकी मनुहार को ठंडे बस्ते में डाल देता है।
ख़ास बात यह है कि कन्हैया लाल की मौत ड्यूटी के दौरान हुई थी, बावजूद इसके परिवार को न तो अनुकंपा नियुक्ति दी जा रही है और ना ही किसी तरह की कोई आर्थिक मदद। पीड़ित परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते और गुहार लगाते बेबस और लाचार हो चुका है। आर्थिक हालात भी ऐसे नहीं की भरण पोषण हो सके।
मृतक कर्मचारी की विधवा बताती हैं कि उनकी मां और रिश्तेदारों के भरोसे दो वक्त की रोटी तो नसीब होती है लेकिन तीन बच्चों को लेकर आखिर वह कब तक यूं ही लाचार और बेबस रहे। ना जाने कितने बार प्रशासन से नियमों के अधीन पात्रता होने के बाद भी न ही अनुकंपा नियुक्ति दी जा रही है और ना ही आज तक किसी तरह की कोई आर्थिक मदद ही मिली है।
भले ही पिछले 2 सालों से प्रशासन अफसरशाही की चादर ओढ़े कुंभकरण की नींद में सोया हो लेकिन मीडिया का कैमरा सामने आते ही अब अधिकारी जल्द ही दस्तावेजों के आधार पर आर्थिक मदद और नियम संगत अनुकंपा नियुक्ति के पर नौकरी देने की बात कर रहे हैं।
