झाबुआ। प्रसिद्ध कड़कनाथ मुर्गा अब आदिवासी बाहुल्य जिले में रोजगार और कुपोषण की लड़ाई लड़ेगा। इसके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने गांवों में 115 परिवारों को कड़कनाथ मुर्गे के चूजे बांटे हैं। शासन की इस पहल पर आदिवासियों ने ख़ुशी जाहिर की है। उनका मानना है कि इससे इलाकें में कुपोषण और गरीबी दूर होगी।
दरअसल झाबुआ जिले का विख्यात कड़कनाथ मुर्गा देशी मुर्गा से कहीं अधिक पौष्टिक एवं कोलेस्ट्रॉल विहीन होता है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने आदिवासी बाहुल्य उमरिया जिले के आकाशकोट अंचल के 115 परिवारों को कड़कनाथ मुर्गे के प्रति परिवार 51 चूजे चूजे दिए है। हितग्राहियों का मानना है कि कड़कनाथ मुर्गे के पालन से उन्हें आजीविका और कुपोषण को दूर भगाने में मदद मिलेगी।
बता दें आकाशकोट इलाके के 25 गांवो में व्याप्त बेरोजगारी एवं कुपोषण को दूर करने जिला प्रशासन ने पशु स्वाथ्य विभाग से कॉन्वर्जेशन कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आदिवासियों को कड़कनाथ मुर्गे के चूजे दिए गए हैं। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यह मुर्गा देशी मुर्गा से कहीं अधिक पौष्टिक एवं कोलेस्ट्रॉल विहीन होता है। अधिकारियों ने भी दावा किया है कि इलाके में खुशहाली लाने के लिए यह मददगार साबित होगा।
बता दें छत्तीसगढ़ से बड़ी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मध्यप्रदेश को कड़कनाथ मुर्गे का जीआई टैग मिला है लेकिन अभी तक यह महज झाबुआ जिले तक सीमित था लेकिन अब इसकी मौजूदगी और गुणवत्ता का लाभ पूरे मध्यप्रदेश एवं देश में दिलाने यह कवायत शुरू की गई है।
