सीहोर। प्रदेश की बेटी बुशरा खान ने नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में दो हजार मीटर की दौड़ में परचम लहराया है। बुशरा ने दो हजार मीटर की दौड़ मात्र 6 मिनट 24 सेकंड में पूरी करके पिछले पांच सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है।
दरअसल आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के पास गुंटुर में 35वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप का आयोजन किया गया था। चैम्पियनशिप के आखिरी दिन बुधवार को सीहोर की रहने वाली बुशरा खान ने दो हजार मीटर दौड़ में पिछले पांच सालों का रिकार्ड तोड़ दिया। बुशरा ने सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर दौड़ शुरू की और 7 बजकर 36 मिनट 24 सेकंड पर दौड़ पूरी करने नया कीर्तिमान रच दिया।
बुशरा की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही शहर में आई तो पूरे शहर ने खुशियाँ मनाई। शहर की उड़न परी कहलाने वाली बुशरा कक्षा 10वीं की छात्रा है। बुशरा ने सीहोर में ही एथलेटिक्स की ट्रेनिंग शुरू की थी। उसने विशाखापट्टनम में वर्ष 2017 में 600 मीटर की दौड़ में ब्राउंस मेडल प्राप्त किया था। इसके बाद 2018 में तिरुपति में बुशरा ने 1000 मीटर की दौड़ में सिल्वर मेडल प्राप्त किया था। बुशरा की इस उपलब्धि पर नगर के खेल प्रेमियों में हर्ष की लहर दौड़ गई।
बुशरा खान सीहोर से 5 किलोमिटर दूर स्थित छोटे से गाँव पचामा के निवासी गफ्फार खान गौरी की बेटी है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी बचपन से ही बुशरा में कुछ करने का जज्बा था। बुशरा ने एथलेटिक्स में कड़ी मेहनत की। सबसे पहले कोच दुष्यंत ने बुशरा को ट्रेनिंग दी थी। इसके बाद जिला एथलेटिक्स संघ के सहायक सचिव प्रभात मेवाड़ा ने बुशरा के इस हुनर को परखा और चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद बुशरा ने पीछे मुड़कर नही देखा और अगल अलग जगह आयोजित होने वाली हर चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया। बुशरा के हर प्रतियोगिता में जीतने के कारण ही बुशरा को जिले में उड़न परी के नाम से लोग जानने लगे।
बुशरा के पिता गफ्फार खान मिल में मजदूर है। बुशरा की दो छोटी बहन है। कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद गफ्फार ने बुशरा के लिए वो तमाम संसाधन जुटाए जो एक खिलाड़ी के लिए आवयश्क होते है। बुशरा की खेल जरूरतों पूरी करने की खातिर बुशरा की माँ ने अपने पास मौजूद जो थोड़े से जेवर थे वो भी बेच दिए। बुशरा ने अपनी लगन से रेस जीतकर न सिर्फ अपने परिजनों का बल्कि शहर का नाम भी रोशन किया है।
