नरसिंहपुर। अंधविश्वास के कारण होशंगाबाद के महुआ में एक पेड़ को छूने के लिए लोगों में होड़ मच गई थी। कुछ ऐसा ही मामला नरसिंहपुर में भी सामने आया है। जहाँ एक पोहे के पेड़ से निकल रही पानी की धार को लोग अमृत समझकर पी रहे हैं। धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर अफवाह फ़ैल गई कि इस पानी को पीने से सारे रोग दूर हो जाते हैं। अब वहां पर रोगों से ग्रसित मरीज ही पहुंचने लगे हैं। कुछ लोगों ने दावा किया हैं कि उन्होंने लोगों को यहां ठीक होते हुए भी देखा है।
दरअसल नरसिंहपुर के कुमड़ा खेड़ा गांव में शारदा मंदिर के पास एक पोहे के पेड़ से अचानक पानी की धार निकलने लगी। इसे देखने के लिए वहां लोग जुटने लगे। कोई इसे अमृत की धारा मान रहा हैं तो कोई गंगाजल। वहीँ कुछ लोग दावा करने लगे कि इसे पीने से सारे रोग दूर हो जाते हैं।
धीरे-धीरे यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और फिर शुरू हो गया आस्था के नाम पर अंधविश्वास का खेल। अब वहां पर रोगों से ग्रसित मरीज ही पहुंचने लगे हैं। शारदा माता के मंदिर की वजह से लोग इसे माता का चमत्कार मान रहे हैं। जल पीने से ठीक होने की आस लिए लोग यहां पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि यहां बकायदा इसे लेकर माइक पर अनाउंस भी किया जा रहा है और आस्था का खेल कुछ अंधविश्वासियों द्वारा जमकर फैलाया जा रहा है।
आस्था और अंधविश्वास के इस खेल को कृषि विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिक पूरी तरह नकारते नजर आ रहे हैं। उनका साफ कहना है कि कई बार धरती पर जियोलाजिकल प्रेशर की वजह से पेड़ों से पानी का रिसाव शुरू हो जाता है। कई बार पेड़ों में अधिक आद्रता के चलते भी ऐसा हो मुमकिन है। इसका आस्था से कोई वास्ता नहीं है। यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया मात्र है।
