जबलपुर। कानून और कला का संगम बमुश्किल हो पाता है, लेकिन जब यह दोनों एक साथ हो जाएं तो सोने पर सुहागा भी नजर आता है। प्रदेश के एक थाना प्रभारी ऐसे भी है जो अपनी दबंग छवी के लिए पहचाने जाते है। लेकिन जब वह संगीत पर हाथ अजमाते है तो लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
जबलपुर के मदन महल थाने के संदीप अयाची के नाम से ही गुंडे कांपते हैं। लेकिन उनकी दबंग छवी के पीछे एक कलाकार छिपा है। संदीप को जब भी मौका मिलता है वह कानून की रखवाली के साथ संगीत साधना में भी पीछे नहीं हटते है। संगीत में विशारद की डिग्री लिए संदीप अयाची जितनी ज्यादा सुरीली बांसुरी बजाते हैं। उतने ही मोहक अंदाज में तबला भी बजाते हैं। इनके होठों से लगते ही माउथ ऑर्गन मधुर धुन बिखेरने लगता है। वहीँ संदीप का गाना सुन लोग भी इनके कायल हो जाते हैं। इनके अलावा संदीप बैंड में भी हाथ आजमा लेते हैं।
संदीप अयाची पुलिस विभाग में ऐसे अफसर हैं जिनकी महफिल राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुकी है। विज्ञान भवन में भी अपनी कला का लोहा मनवाने में पीछे नहीं रहे। ये बांसुरी की तान जब छेड़ते हैं तो लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते हैं। खासकर हनुमान चालीसा पर संदीप बहुत ही अच्छी तरह से बांसुरी बजाते हैं। तबले की थाप भी इनकी अनोखी है।
अपनी कला को लेकर संदीप अयाची का कहना है कि मैं विशुद्ध रूप से कलाकार ही हूं लेकिन मेरी लगन पुलिस विभाग पर भी थी इसलिए मैंने पुलिस सर्विस ज्वाइन की। संदीप खुद मानते हैं कि संगीत आत्मा से जोड़ता है और जो आत्मा से जुड़ता है उसमें कुटिलता ही दूर हो जाती है। संदीप मानते हैं कि मैं संगीत के साथ-साथ एक सहृदय भी हूं और यही नजर मेरी पोस्टिंग में भी आती है। अगर कोई बेगुनाह है तो उसको थोड़ा सा भी कष्ट नहीं होना चाहिए और गुनाहगार को सजा दिलवाना भी मेरा पहला कर्तव्य है।
संदीप अयाची पुलिस लाइन में होली, दिवाली पर पुलिस परिवार के कार्यक्रमों से लेकर परिचितों की महफ़िल में भी अपने संगीत हुनर के जलबे विखेरते नजऱ आते है। खाकी का रौब और ठसक गुंडों बदमाशों पर भारी पड़ती है तो कलाकार की धमक उन्हें हर किसी का हर दिल अजीज बना रहा है।
