आगर-मालवा। प्रदेश की एक गरीब महिला बिस्तर पर पड़े अपने लाचार और बेबस पति को देख खून के आंसू रोने को मजबूर है। पति के इलाज के लिए महिला ने अपना घर भी गिरवी रख दिया। महिला भगवान से प्रार्थना कर रही हैं कि अब पति और मुझे मृत्यु दे दो ताकि सारे संकटों से मुक्त हो जाए। महिला के दो बच्चे है जो अपनी पढ़ाई छोड़कर मजदूरी कर रहे है ताकि पिता के लिए दवाई का प्रबंध हो सके। इस परिवार के पास इतना पैसा भी नहीं है कि वह दो वक्त की रोटी खा सके। इस बेबस और लाचार परिवार की सुनने वाला इस दुनिया में कोई नहीं है। इन्हें अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है।
सरकार हर साल स्वास्थ्य पर करोड़ो रुपए खर्च करती है। गरीबों के मुफ्त इलाज के लाख दावें किए जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत सरकार के दावों से उलट है। आगर-मालवा जिले के निपानिया बैजनाथ का रहने वाला 48 वर्षीय मोहन सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। परिजन मोहन को लेकर जिला चिकित्सालय आगर पहुंचे जहाँ डॉक्टरों ने मामला गंभीर होने के कारण उज्जैन रेफर कर दिया। जब परिजन मोहन को लेकर उज्जैन पहुंचे तो वहां से शासकीय अस्पताल द्वारा उन्हें कहीं और भेजने की बात कही।
आखिरकार कोई मदद ना मिलने के कारण मोहन की पत्नी रामकन्या ने एक निजी अस्पताल में पहुंचकर अपने पति का इलाज करवाया। पति के ऑपरेशन के खर्च के पैसे नहीं होने के कारण रामकन्या ने अपना मकान गिरवी रख दिया। जैसे-तैसे ढाई लाख रुपए इकट्ठा कर पति का ऑपरेशन करवाया। अस्पताल से घर आने के बाद से मोहन बिस्तर पर ही पड़ा है। उसके इलाज और दवाइयों के लिए परिवार दर-दर भटक रहा है। परिजन कभी इंदौर तो भोपाल जाकर अस्पताल में इलाज कराने की कोशिश करता है। लेकिन अब हालत यह हैं कि पैसों की कमी के चलते यह परिवार आज मौत का इंतजार कर रहा है।
परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब है। मोहन के इलाज के लिए बेटी निर्मला और बेटे ने पढ़ाई छोड़ दी है। वह दोनों दूसरों के घर मजदूरी करने जाते हैं। मजदूरी करने के बाद उन्हें जो भी पैसा मिलता है उस पैसे से अपने पिता का इलाज करवाते हैं। यदि कुछ पैसा बच जाए तो एक वक्त की रोटी खा लेते हैं।
इस पूरे मामले में चौकाने वाली बात यह है कि यह परिवार बीपीएल योजना के अंतर्गत भी आता है तो वहीं दूसरी ओर आयुष्मान योजना में भी इनका कार्ड बना हुआ है। मगर आर्थिक सहायता इनसे कोसों दूर है। शासन की तमाम योजनाओं को आईना दिखाता यहां परिवार इस बात के लिए भी दुखी है कि शासन से उन्हें ना तो कोई मदद मिल रही है और ना ही राजनेताओं, अधिकारियों को उनकी तकलीफ का अंदेशा है। इस पूरे मामले के बारे में जब आगर-मालवा जिले के कलेक्टर से बात की गई तो कलेक्टर ने जल्द ही उन तक शासकीय मदद पहुंचाने की बात कही है।
