May 10, 2026

इस गाँव ने संस्कृत को बनाया बोलचाल की भाषा

नरसिंहपुर। आधुनिकता की इस दौड़ में प्रदेश का एक गाँव ऐसा भी है जो अपनी संस्कृति को जीवित रखे हुए है। इस गाँव के लोग संस्कृत में बातचीत करते हैं। चाहे बुजुर्गों की चौपाल हो या घर घर में आपसी बातचीत या फिर चाहे राह चलते दुआ सलाम, हर कोई संस्कृत में अपनी बात कहता है। ख़ास बात यह है कि गाँव के बुजुर्ग अपनी आगामी पीढ़ी को भी संस्कृत का अध्ययन करा रहे हैं।

संस्कृत भाषा आज नरसिंहपुर जिले के मोहद गांव की पहचान बन गई है। गाँव में कई लोग धारा प्रवाह संस्कृत बोलते हैं वहीँ कई लोग धीरे-धीरे ही सही लेकिन संस्कृत में बातचीत करते हैं। गाँव वालों का यही प्रयास हैं कि आने वाली पीढ़ी के नैतिक जीवन में आदर्श आचरण संहिता को स्थापित करना है तो संस्कृत भाषा का ज्ञान जरुरी है। इसके लिए संस्कृत भाषा को बोलचाल का हिस्सा बनाना होगा। ग्रामीणों का मानना हैं कि संस्कृत भाषा को जितना जटिल समझा जाता है वह उतनी ही सरल है।

ग्रामीणों में मुताबिक जहां आज स्कूलों में अंग्रेजी भाषा को विशेष महत्त्व दिया जाता है और हिंदी को ही दरकिनार कर दिया जाता है। वहीं गांव के हर स्कूल में संस्कृत को सर्वोच्च भाषा मानकर उसका अध्ययन कराया जाता है और मंत्रोचारण के बाद ही यहां स्कूली शिक्षा की शुरुआत होती है।

संस्कृत को विश्व की अन्य भाषाओं की जननी कहा जाता है। पूरी दुनिया में संस्कृत सबसे शुद्ध भाषा मानी जाती है। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी ही इस धरोहर को भूलते जा रहे हैं। ऐसे में मोहद गांव देश के लिए एक मिशाल बनकर उभर रहा है जहां इसे जनसामान्य की भाषा के लिए अपनाया गया है और जिसे पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

Written by XT Correspondent

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