शाजापुर। ग्रामीण अंचलों की स्थिति को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे करती हैं। लेकिन शाजापुर जिले का एक गाँव आजादी के कई दशक बीतने के बाद भी अपनी दुर्दशा को लेकर आंसू बहा रहा है। यह गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों को रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर लकड़ी के पटीयो से बने पुल से आना-जाना पड़ता है। इस लकड़ी के पुल पर कई हादसे हो चुके हैं। कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। लेकिन लगता है प्रशासन को इनकी जान की कोई परवाह ही नहीं है।
मामला शाजापुर जिले के शुजालपुर जनपद पंचायत के ग्राम पेऊँची का है। इस गाँव में लगभग 50 परिवार रहते हैं। गाँव और मुख्य सड़क के बीच में एक नाला पड़ता है। ग्रामीणों को रोजाना नाले पर बने लकड़ी के पुल के सहारे ही आना जाना पड़ता है। ग्रामीण कई बार प्रशासन और नेताओं से नाले पर पुल बनाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा इन्हें कुछ नहीं मिला। ग्रामीणों के पास अपने वाहन तो है, लेकिन पुल के कारण उन्हें वाहनों को 2 किलोमीटर दूर ही छोड़ कर आना पड़ता है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी इसी पुल से आना-जाना पड़ता है। ग्रामीण बच्चों का हाथ पकड़कर उन्हें पुल पार करवाते हैं।
बता दें कि इस लकड़ी के पुल पर कई हादसे हो चुके हैं। कई लोग अपनी जान गवा चुके हैं। कई बार लोग नाले में गिरकर पानी के तेज बहाव में बह कर आगे निकले हैं। पुलिस द्वारा रेस्क्यू भी करवाया गया लेकिन इस पुल की ओर किसी की निगाह नहीं पड़ी।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनसुनवाई से लेकर जन चौपाल तक मामले को उठाया लेकिन कुछ नहीं हुआ। गांव में ग्राम पंचायत भी लगती है लेकिन सरपंच से लेकर विधायक सांसद कोई भी इनकी सुनने को तैयार नहीं है। ख़ास बात यह है कि नेता वोट मांगने के लिए इसी पुल से गाँव में आते हैं और पुल बनाने का आश्वासन देते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह अपना वादा जो इन ग्रामीणों से किया है उसे भूल जाते हैं।
शासन-प्रशासन से लेकर नेताओं की चौखट पर गुहार लगाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो थक-हार कर ग्रामीणों ने 50 फीट लंबी रस्सी दोनों और बांधी। रस्सी पर लकड़ी के पटिए बांधकर पुल बनाया। यह पुल ही नाला पार करने का एक मात्र सहारा है।
