इंदौर। इंदौर में आयकर विभाग ने भगवान को नोटिस थमाया है। आयकर विभाग ने 2 करोड़ की कर चोरी के मामले में नोटिस दिया है। वहीँ मंदिर प्रशासक का कहना है कि मंदिर सरकारी जमीन पर बना हुआ है। इसलिए मंदिर का ट्रस्ट आयकर एक्ट की धारा में रजिस्टर्ड होना जरुरी नहीं है।
दरअसल नोटबंदी के दौरान शहर के प्रसिद्ध प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर की दान पेटियों से लगभग 26 लाख रुपए से अधिक की राशी मिली थी। इस राशी को मंदिर प्रबंधन ने मंदिर के नाम पर खुले बैंक खाते में जमा करा दिया था। इतनी बड़ी संख्या में राशी बैंक में जमा होने से आयकर विभाग ने मामले को संदिग्ध मानते हुए पकड़ लिया। जब विभाग ने 2016-17 की मंदिर की आय निकाली तो पता चला कि मंदिर को दान में करीब सवा दो करोड़ रुपए की राशि मिली थी। आयकर विभाग ने जब आगे जाँच की तो पता चला कि मंदिर का ट्रस्ट आयकर एक्ट की धारा में रजिस्टर्ड नहीं है। इसके चलते नए आयकर नियम के तहत 77 फीसदी टैक्स और पेनल्टी लगाकर करीब दो करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड निकल गई।
आयकर विभाग ने टैक्स डिमांड निकालने से पहले मंदिर प्रबंधक को पत्र भी भेजे थे, लेकिन मंदिर में यह पत्र दबा रह गया और मंदिर प्रशासक व एसडीएम रवि कुमार सिंह को इसकी जानकारी ही नहीं मिली। जब विभाग ने टैक्स डिमांड सम्बन्धी नोटिस तो उन्हें इसके बारे में पता चला। मंदिर प्रशासक तुरंत आयकर विभाग से मिला और बताया कि मंदिर सरकारी जमीन पर बना हुआ है। इसलिए मंदिर का ट्रस्ट आयकर एक्ट की धारा में रजिस्टर्ड होना जरुरी नहीं है। हालाँकि विभाग मंदिर प्रशासक की बात से सहमत नहीं हुआ और टैक्स पे करने की बात कही।
