देवास। पिछले काफी समय से देखा जा रहा है कि इंदौर की कान्ह नदी के कारण क्षिप्रा नदी का पानी गंदा हो रहा है। लेकिन क्षिप्रा का पानी उज्जैन जाते समय देवास के रास्ते में ही जहरीला हो रहा हैं। कई औद्योगिक इकाइयां अपने यहां का केमिकल नदी में छोड़ रहे हैं। केमिकल के असर के कारण क्षिप्रा का पानी जहरीला हो रहा है।
दरअसल देवास से 10 किमी दूर हवनखेड़ी से ही क्षिप्रा के पानी को दूषित किया जा रहा है। नागदा से निकली नागधम्मन नदी भी क्षिप्रा नदी में मिल रही है। नागधम्मन नदी औद्योगिक क्षेत्र में गंदे जहरीले नाले की तरह हो जाती है। इसके पानी की बदूब आप बर्दाश्त नहीं कर सकते। देवास की कई औद्योगिक इकाइयां चोरी-छिपे अपने यहां का केमिकल नदी में छोड़ देते हैं। इससे पानी जहरीला हो जाता है। गंभीर बात यह है कि क्षिप्रा का पानी पेयजल के रूप में भी उपयोग किया जाता हैं। यह सीधे-सीधे लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ की तरह है।
प्रदेश के पर्यावरण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि मैंने अधिकारियों से रिपोर्ट देने को कहा है। हम किसी कंपनी को अब नोटिस नहीं देंगे, उसे सीधे ही बंद करने की कार्रवाई ही करेंगे। सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि नागधम्मन नदी अगर शिप्रा में मिल रही है तो ये बेहद गंभीर मामला हैं। इस नदी को पहले ही कंपनियों के केमिकल ने जहरीला बना दिया हैं। मुझे भी शिकायतें लगातार मिल रही थी। आज ही प्रदूषण विभाग के अमले को निरीक्षण के लिए कहा था। जो कंपनियां चोरी छिपे नदी में केमिकल बहा रहा है, उन्हें अब नोटिस देकर नहीं पूछा जाएगा। ऐसी कंपनियों को चिन्हित कर उन्हें अब बंद करने की कार्रवाई करेंगे।
वहीँ जिला स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि नदी के गंदे पानी से गंभीर बीमारी हो सकती है। प्रशासन को जल्द ही इस गंभीर समस्या पर ध्यान देना चाहिए।
