छतरपुर। प्रदेश में भले ही सरकार बदल गई हो लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के हालत बदलने का नाम नहीं ले रहे हैं। छतरपुर जिले में महिलाओं की नसबंदी के लिए लगाए गए शिविर में मोबाइल की रोशनी में ऑपरेशन किए जाने का मामला सामने आया है। शिविर में महिलाओं को सुलाने के लिए पलंग की व्यवस्था भी नहीं की गई थी।
दरअसल राज्य सरकार भले ही स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन अधिकारी-कर्मचारियों की मनमर्जी के चलते शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को नहीं मिल पा रहा है। छतरपुर जिले के बक्सवाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक बार फिर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं की नसबंदी के लिए शिविर लगाया जा रहा है। शिविर में व्यवस्थाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
क्षेत्र की महिलाएं अपनी नसबंदी कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रही हैं। लेकिन शिविर में महिलाओं के लिए न ही पलंग की व्यवस्था है और ना ही पर्याप्त रोशनी की। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 4 इलेक्ट्रिशियन जनरेटर उपलब्ध है, लेकिन जब इस बारे में आला अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी हमारे स्वास्थ्य केंद्र में लाईन फाल्ट होने के कारण जनरेटर बंद पड़े हुए हैं। ऑपरेशन के दौरान बिजली गुल होने पर ऑपरेशन भी मोबाइल की रोशनी में किए जा रहे हैं।
मामले में अधिकारी का कहना है कि बिजली चली गई थी और जनरेटर खराब था जो पुराने बीएमओ द्वारा सुधरवाया नही गया था। अब वो सुधर गया है। आगे से ऐसा नहीं होगा और विद्युत मंडल को भी लिख के दिया गया है कि जिस दिन शिविर हो बिजली कटौती न हो।
बता दे कि बक्सवाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हमेशा से ही सवालों के घेरे में बना रहता है। यहां सप्ताह में एक या दो बार ही डॉक्टर अपनी मनमर्जी से आकर हस्ताक्षर पंजी पर हस्ताक्षर बनाकर अपने घर पर आराम फरमाते हैं। स्वास्थ्य केंद्र में ना तो कभी मरीजों को समय से इलाज मिल पा रहा है और ना ही करोड़ रुपए की रखी औषधि कक्ष में दवाई बांटी जा रही है।
