May 7, 2026

टकटईगढ़ लोकरंग महोत्सव में बिखरे कला के रंग

उमरिया। खत्म होती लोक संस्कृतियों एवं परंपराओं को जीवित रखने के लिए उमरिया में लोकरंग महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव में दर्जन भर गांवों के हजारों लोग शामिल हुए। लोकरंग महोत्सव में बंजारा, भुइयां, बैगा और गोंड समाज के लोगों ने नृत्य की प्रस्तुति दी। इस दौरान सहभोज का आयोजन कर भाईचारे का संदेश भी दिया गया।

दरअसल आदिवासी बाहुल्य उमरिया जिले में समाज से विलुप्त होती लोक परंपराओं और संस्कृतियों के संरक्षण के लिए सुरम्य वादियों के बीच स्थित ग्राम बंधवा टोला में टकटईगढ़ लोकरंग महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें आदिवासी समाज के बंजारा, भुइयां, बैगा और गोंड़ लोक कला दल के लोगों ने हिस्सा लिया। समाज के परंपरागत नृत्य और गायन की प्रस्तुति देख वहां उपस्थित लोग अभिभूत हो गए।

इस आयोजन में आसपास के दर्जन भर गांव के हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। महोत्सव में शामिल लोगों ने एक दूसरे की लोक संस्कृति को जाना समझा। इस दौरान बंजारा समाज के लहंगी नृत्य को लोगों ने पहली बार देखा और खूब सराहा।

समाज में लोक कलाओं के सरंक्षण के लिए भले ही सरकार की अपनी योजनाएं हो लेकिन गरीबी और जानकारी के अभाव में लोक परंपराएं लगातार गायब हो रही है। इस आयोजन के बाद पुरानी परम्पराएं एक बार फिर से जी उठी हैं। आयोजक मंडल की माने तो नई पीढ़ी के युवा वर्ग को इन संस्कृतियों और लोक परंपराओं का पाठ पढ़ाना होगा ताकि ये समाज की मुख्य धारा में बनी रहें।

विंध्य मैकल पर्वत श्रृंखला पर जमीन से 1000 फुट ऊपर स्थित टकटईगढ़ दसवीं शताब्दी तक गोंडवाना साम्राज्य का किला था लेकिन कालांतर में यह खंडहर में तब्दील हो गया। टकटईगढ़ को फिर से संवारने और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सामाजिक परंपराओं के साथ शुरू की गई यह मुहिम न सिर्फ कारगर साबित बल्कि समाज की लोक मान्यता को भी नए रूप में सामने लाएगी।

Written by XT Correspondent

bettilt giriş bettilt giriş bettilt pin up pinco pinco giriş bahsegel giriş bahsegel paribahis paribahis giriş casinomhub giriş rokubet giriş slotbey giriş marsbahis giriş casino siteleri