May 7, 2026

धक्का मुक्की और घंटों क़तार में खड़े रहने के बाद भी नसीब नहीं हो रहा यूरिया

आगर-मालवा। प्रदेश का किसान पिछले कई दिनों से यूरिया संकट से जूझ रहा है। घंटों लाइन में खड़ा रहने के बाद भी किसानों को यूरिया नहीं मिल रहा है। कहीं यूरिया आता भी है तो किसानों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है, ताकि यूरिया खत्म होने से पहले उन्हें खाद मिल सके। प्रदेश के आगर-मालवा में भी ऐसी तस्वीरें देखी जा रही है। यहाँ यूरिया के लिए किसानों की लंबी-लंबी लाइन देखी जा रही है।

दो दिन पहले आगर-मालवा में किसानों द्वारा आधार कार्ड और पावतीयों की लाइन लगाकर भीड़ से निजात पाने की तस्वीरें सामने आई थी। अब यूरिया खाद के लिए सुबह से ही किसानों की लंबी-लंबी कतार नजर आ रही है। कई किसान ऐसे भी है जो दो दिनों से कतार में लगे हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है।

ऐसे में जब वहां यूरिया खाद से भरा ट्रक पहुंचा तो किसानों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। किसानों के बीच आगे बढ़ने की होड़ मच गई ताकि उन्हें खाद खत्म होने से पहले मिल जाए। लंबी-लंबी कतारों में खड़े किसान यही चाहते हैं कि वह जल्द से जल्द खाद के ट्रक के समीप पहुंचे और यूरिया खाद लेकर अपनी फसल को बचा पाए।

क्षेत्र के किसान शंकर सिंह का कहना है कि, सुबह से लाइन में खड़े हैं। इतनी लंबी लाइन है। अब हमें खाद मिलेगी कि नहीं यह उम्मीद कम लग रही है। वहीँ दूसरे किसान भारत गोस्वामी का कहना है कि हम यहां सुबह से लाइन में खड़े हैं। अधिकारियों से हमने कहा था कि आप हमें टोकन वितरित कर दो। मगर अधिकारियों ने हमारी बात नहीं सुनी। हम यहां सुबह से खड़े हैं। अब यहां थोड़ी सी ही गाड़ी बची है और किसानों को खाद मिलेगा या नहीं पता नहीं। जितनी परेशानी आगर जिले में हो रही है इतनी कहीं भी नहीं है।

वहीँ अधिकारियों का कहना है कि खाद दी जा रही है जो लोग एक या दो दिन पहले खाद लेकर गए हैं, उन्हें प्राथमिकता नहीं देते हुए दूसरों को खाद दे रहे हैं। अधिकारियों का मानना यह भी है कि सभी को खाद मिल जाएगी। मगर वास्तव में देखा जाए तो खाद नहीं होने से किसानों में व्याकुलता साफ दिखाई दे रही है।

Written by XT Correspondent

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