May 7, 2026

एमपी के इस गाँव की हक़ीक़त आपको चौंका देगी, राजा के श्राप से हर कोई बन गया था पत्थर

देवास। भारत में कई ऐसी जगह है जिनके बारे में यकीन करना साधारण जन की बात नहीं है। मध्य प्रदेश में भी एक ऐसा गाँव है, जिसकी अजीब दुनिया को समझ पाना आसान नहीं है। इस गाँव में आज भी खुदाई करने पर नीचे से मूर्तियाँ निकलती है। अब तक हजारों मूर्तियों को जमीन में से निकाला जा चुका है। इस गाँव को लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में राजा के श्राप के कारण पूरा गाँव पाषाण में बदल गया था। सभी व्यक्ति, पशु और पक्षी पत्थर के हो गए थे। इसके बाद पूरी नगरी जमीन में दफ़न हो गई थी। इस गाँव में भगवान शिव का दो हजार साल पुराना मंदिर भी है।

देवास की सोनकच्छ तहसील में स्थित इस अजूबे गाँव का नाम गंधर्वपुरी है। पहले इसका नाम चंपावती हुआ करता था। बाद में चंपावती के पुत्र गंधर्वसेन के नाम पर इस नगर का नाम गंधर्वपुरी हो गया। जनश्रुति है कि राजा गंधर्वसेन के श्राप के कारण ही गंधर्व नगरी पाषाण की हो गई थी। गंधर्वसेन को लेकर मान्यता है कि उनके पास एक चमत्कारिक खोल थी। यह खोल पहनकर गंधर्वसेन दिन में गधे और रात में गधे की खोल उतारकर राजकुमार बन जाते थे। गंधर्वसेन ने चार विवाह किए थे। उनकी पत्नियाँ चारों वर्णों से थीं। क्षत्राणी से उनके तीन पुत्र हुए सेनापति शंख, राजा विक्रमादित्य तथा ऋषि भर्तृहरि।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि इस नगरी के राजा की पुत्री ने राजा की मर्जी के खिलाफ गंधर्वसेन से विवाह रचाया था। जब राजा को इस बात का पता चला तो उन्होंने रात को गंधर्वसेन की चमत्कारिक खोल को जलवा दिया। इससे गंधर्वसेन भी जलने लगे और जलते-जलते उन्होंने श्राप दिया कि इस नगरी में जो भी रहते हैं वह सभी पत्थर के बन जाएंगे।

ग्रामीणों ने बताया कि इस गाँव के नीचे एक प्राचीन नगरी दबी हुई है। यहाँ हजारों मूर्तियां हैं। यहाँ पर 1996 में एक संग्रहालय का निर्माण किया गया था। संग्रहालय में करीब 300 ख़ास मूर्तियों को रखा गया है। इसके अलावा राजा गंधर्व सेन के मंदिर में भी कई मूर्तियों को रखा गया है। वहीँ नगर में भी यहाँ-वहां मूर्तियाँ बिखरी पड़ी हैं। गंधर्वपुरी नगरी में आज भी खुदाई के दौरान बुद्ध, महावीर, विष्णु के अलावा ग्रामीणों की दिनचर्या के दृश्यों से सजी मोहक मूर्तियाँ मिलती रहती हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि संरक्षण के अभाव में यहाँ से सैकड़ों मूर्तियाँ लापता हो गई हैं।

गाँव में स्थित गंधर्वसेन मंदिर को लेकर मान्यता है कि इस मंदिर में रोजाना पीले रंग का इच्छाधारी नाग आता है और दर्जनों चूहे उसकी परिक्रमा करते हैं। इस गांव के लोग इसे नागराज का ‘चूहापाली’ स्थान कहते हैं जो हज़ारों साल पुराना है। गाँव वालों का कहना है कि उन्होने नाग और चूहों को अपनी आंखों से तो नहीं देखा, लेकिन हर रोज़ परिक्रमा करने के स्थान पर चूहों का मल और बीच में नाग का मल पाया जाता है।

ग्रामीणों का मानना है कि यहां पर राजा गंधर्वसेन मंदिर सात-आठ खंडों में था, जिसके बीचोबीच राजा की मूर्ति स्थापित थी, लेकिन अब सिर्फ राजा की मूर्ति वाला मंदिर ही बचा है। यहां के लोग बताते हैं कि चूहापाली में चूहों के बीच विराजनेवाले नागराज वर्षों से इस गांव के लोगों की रक्षा करते आ रहे हैं। नागराज की शरण में आने वाले भक्तों का हर दुख मिट जाता है और उन्हें शांति का अनुभव होता है। नागराज के प्रति लोगों की आस्था उन्हें यहां खींच लाती है। बहरहाल हजारों साल पुराने इस मंदिर की नींव, स्तंभ और दीवारें बौद्धकाल की बताई जाती है। लेकिन यह भी सच है कि यहां पर साक्षात रुप में इच्छाधारी नाग और उनकी परिक्रमा करने वाले चूहों को किसी ने नहीं देखा है। मध्यप्रदेश के देवास जिले के गाँव गंधर्वपुरी को श्रापित गाँव माना जाता है।

Written by XT Correspondent

bettilt giriş bettilt giriş bettilt pin up pinco pinco giriş bahsegel giriş bahsegel paribahis paribahis giriş casinomhub giriş rokubet giriş slotbey giriş marsbahis giriş casino siteleri