बालाघाट। बालाघाट के करीब आधा दर्जन गांवों के किसान माइंस के कारण सालों से सिंचाई संकट का सामना कर रहे हैं। सिचाई के लिए नहर नहीं होने के कारण इन गांवों की करीब 26सौ एकड़ जमीन पर सिंचाई नहीं हो पाती है। क्षेत्र में नहर बनाने के लिए सर्वे का काम भी हो चुका है लेकिन माइंस होने के कारण नहर को स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
दरअसल जिले की खैरलांजी तहसील के पांढरवानी में राजीव सागर बांध से नहर बनाने के लिए सर्वे किया गया था। सर्वे में जहाँ से नहर निकलना था उस से कुछ दूरी पर माइंस होने से नहर को स्वीकृति नहीं मिली।
किसानों का कहना है कि एक माइंस के कारण आधा दर्जन गांवों के किसान हर साल अपने खेतों की सिंचाई नहीं कर पाते हैं। इसको लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और अफसरों से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
वहीँ माइंस की तरफ से भी ग्रामीणों के लिए पेयजल, दवाइयां और स्वास्थ्य चेकअप जैसे इंतजाम नहीं किए जाते हैं। गर्मी के दिनों में किसानों को पेयजल के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि कैसे माइंस को 15-20 सालों से लगातार स्वीकृति दी जा रही है वहीँ किसानों की परेशानी को अनदेखा किया जा रहा है।
