हरदा। हरदा जिले का हंडिया गांव इन दिनों खामोशी से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में जुटा हुआ है। पूरा गाँव गिरने की कगार पर पहुंच चुके दो पेड़ों को बचाने की कोशिश कर रहा है। इस काम में तहसीलदार से लेकर गांव की महिलाएं और पुरुष सभी श्रमदान कर रहे हैं।
दरअसल इस साल नर्मदा नदी में आई भीषण बाढ़ पेड़ों के नीचे की मिट्टी अपने साथ बहा ले गई थी। मिट्टी खिसकने से गाँव में मौजूद 300 साल पुराने बरगद और पीपल के पेड़ भी तिरछे हो रहे थे। यह पेड़ कभी भी गिर सकते थे। गाँव वालों ने जब पेड़ों को देखा तो उन्होंने दोनों पेड़ों को बचाने की सोची। इसके लिए दोनों पेड़ों के आसपास एक दिवार बनाई और फिर इनकी जड़ो में मिट्टी डालने का काम शुरू किया।
गाँव वालों की इस मुहीम में क्षेत्र के मजदूर भी उनका साथ दे रहे है। पेड़ों के आसपास बनाई गई दिवार के निर्माण में लगे मजदूरों ने इस काम की मजदूरी नहीं ली। गाँव वालों का कहना है कि यह पेड़ क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर है। बुजुर्ग लोग कहते हैं कि वे बचपन से इस पेड़ को देखते आ रहे हैं।
