उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में गुरुवार से शिव नवरात्रि उत्सव की शुरुआत हो गई है। इसी के साथ भगवान महाकाल को हल्दी लगाकर श्रृंगार किया गया। आने वाले नौ दिनों तक महाकाल के दरबार में देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के विवाहोत्सव का उल्लास रहेगा।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में पुरोहित पंडित आशुगुरु ने बताया कि प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के पहले शिव नवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान वर्ष में एक बार महाकालेश्वर भगवान को हल्दी अर्पित की जाती हैं। नौ दिनों तक महाकाल के दरबार में देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के विवाहोत्सव का उल्लास रहता है।
पंडित आशुगुरु के अनुसार महाकालेश्वर भगवान को हल्दी अर्पित नहीं की जाती है। क्योंकि हल्दी स्त्री सौंदर्य प्रसाधन में प्रयोग की जाती है। वहीँ शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है। एक अन्य कारण यह भी है कि हल्दी गर्म होती है और महादेव को शीतल पदार्थ अर्पित किये जाते हैं। लेकिन शिव नवरात्रि के नौ दिनों में बाबा महाकाल को नित्य हल्दी, केशर, चन्दन का उबटन, सुगंधित इत्र, ओषधी, फलो के रस आदि से स्नान करवाया जाता है। जिस तरह विवाह में दूल्हे को हल्दी लगाई जाती है, उसी तरह भगवान महाकालेश्वर को भी हल्दी लगाई जाती है।
नौ दिनों तक शाम को केसर व हल्दी से भगवान महाकालेश्वर का अनूठा श्रृंगार किया जाता है। पुजारी भगवान को हल्दी लगाकर, दूल्हा बनाएंगे। भक्तों को नौ दिन तक भगवान महाकाल अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे। शिव नवरात्रि के नौ दिन दूल्हा स्वरूप में होने वाले राजाधिराज बाबा महाकाल के श्रृंगार के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि के दिन भगवान महाकाल का सेहरा सजाया जाता है।
