पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में रहने वाली दुनिया की सबसे उम्रदराज हथिनी वत्सला को अब दिखाई देना बंद हो गया है। वत्सला की आँखों में मोतियाबिंद हो गया है, इस कारण अब उसकी जिन्दगी में अँधेरा छा गया है। वत्सला अब अपने परिवार के सदस्य हांथियों के सहारे ही जंगल में भ्रमण करती है।
पिछले 20 से भी ज्यादा सालों से वत्सला की सेहत पर नजर रखने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि वत्सला की उम्र अब 100 साल से भी अधिक हो चुकी है। उम्र का असर उसके शरीर पर साफ़ दिखाई दे रहा है। मोतियाबिंद के कारण वत्सला को अब कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। अभी तक हाथियों की आंखों का लेंस नहीं बन पाया है। इस कारण वत्सला की आँखों का इलाज संभव नहीं है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के हाथियों का पूरा कुनबा परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य की पूरी देख-रेख करता है। वत्सला भी हाथियों के सहारे ही जंगल भ्रमण पर जाती है। उसे अब अपनी बची हुई जिन्दगी ऐसे ही हाथियों के कुनबे की मदद से गुजारनी होगी। पार्क प्रबंधन भी वत्सला का पूरा ध्यान रख रहा है। उसे सुगमता से पचने वाला आहार दिया जा रहा है। साथ ही उसके स्वास्थ्य का परीक्षण भी किया जा रहा है।
बता दे कि वत्सला अपनी जिन्दगी में दो बार मौत के मुंह से बाहर आ चुकी है। साल 2003 और 2008 में नर हाथी राम बहादुर ने उस पर प्राणघातक हमला कर दिया था। नर हाथी ने अपने दातों से वत्सला का पेट चीर दिया था। इससे वत्सला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। लेकिन बेहतर इलाज और सेवा से वत्सला एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ी हो गई थी। वत्सला दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी है। मौजूदा समय यह हथिनी देसी व विदेशी पर्यटकों के लिए जहां आकर्षण का केंद्र है। वहीं पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए भी किसी धरोहर से कम नहीं है।
