इंदौर। इंदौर जिले के सैकड़ों गाँव इन दिनों दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। औद्योगिक संस्थानों से निकल रहे रसायनयुक्त दूषित पानी ने जमीन के भीतर मौजूद पानी को भी जहरीला कर दिया है। हालत यह है कि बोरिंगों से भी गंदा पानी निकल रहा है। पानी भी ऐसा कि इंसान तो दूर जानवर भी उसे नहीं पी सकता।
इंदौर जिले के देपालपुर, बेटमा, हातोद, सांवेर क्षेत्र के कई गांवों में पिछले 10 से 15 सालों में यह स्थिति निर्मित हुई है। पहले जहाँ बोरिंगों में साफ़ पानी आता था वहीँ अब ऐसा पानी आता है कि कोई मुंह में लेकर कुल्ला भी नहीं कर सकता। बोरिंगों में पहले सौ फीट तो अच्छा पानी आता है, लेकिन जल स्तर नीचे जाने के बाद गंदा पानी आ रहा है।
ख़ास बात यह है कि गंदा पानी सिर्फ आबादी क्षेत्र में ही आ रहा है। आबादी से दूर खेतों में लगे बोरिंगों में पानी साफ़ आ रहा है, जो कम टीडीएस का है और पीने लायक है। वहीँ आबादी क्षेत्र की बोरिंग में पानी मैला, कड़वा और हल्का पीला आ रहा है। गाँव वालों को भी समझ नहीं आ रहा है कि जो पानी पहले ठीक था वह अब ख़राब कैसे हो गया है।
देपालपुर के बडोलीहोज गाँव के रहवासी भी ख़राब पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। सात साल पहले कुछ अधिकारियों ने यहाँ पहुंचकर ख़राब पानी की पुष्टि की थी। आज हालत यह है कि गाँव के अधिकांश घरों में आज आरओ मशीन लगी हुई है। गाँव के कुछ लोगों का काहना है कि पानी के कारण आरओ मशीन के फ़िल्टर, लोहे के पाइप, मोटर पंप और मशीनरी में पानी लगने से 2-3 सालों में इनका लोहा इतना ख़राब हो गया है कि पानी की गुणवत्ता को ही खत्म कर देता है। ऐसे पानी से नहाने से बाल भी चिपचिपे हो जाते हैं।
इसके अलावा सगडोद, चांदेर, हातोद, रोजड़ी, सुनाला, शहावदा, छोटी कलमेर, हसनाबाद सहित कई गांवों के ग्रामीण गंदे पानी से परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ सालों पहले पानी काफी हल्का आता था और पीने में भी मीठा लगता था, लेकिन पानी पीने लायक नहीं रहा। इस पानी से चाय भी नहीं बना सकते हैं। कई गांवों में तो पानी पीने से गले और पेट में छाले हो जाते हैं।
