राजगढ़। आर्थिक तंगी से जूझ रहा गरीब ब्राह्मण परिवार अपनी बेटी की शादी महज दर्जनभर लोगों की मौजूदगी में करना चाहता था। लेकिन जब सरपंच को इस बारे में पता चला तो सरपंच ने ब्राह्मण परिवार की बेटी को अपनी धर्म बहन बनाकर धूम-धाम से उसकी शादी करवाई। यहीं नहीं शादी में लगभग चार हजार लोगों को भोज भी कराया।
कहते हैं बेटियां अपनी किस्मत खुद लेकर आती है। यहां के एक गरीब परिवार के साथ भी अचानक ऐसा ही हुआ। दरअसल राजगढ़ जिले के करबा गांव में रहने वाले गरीब ब्राह्मण दिनेश शर्मा की बेटी वर्षा की शादी ब्यावरा तहसील के गांव चाठा निवासी रामदयाल शर्मा के बेटे मुकेश से हुई। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण ब्राह्मण परिवार अपनी बेटी की शादी धूमधाम से नहीं कर सकता था। इस बीच तय हुआ कि खिलचीपुर के गायत्री मंदिर में दर्जन भर मेहमानों के बीच शादी सम्पन्न होगी।
जब दुल्हन के माता-पिता चाठा गांव गए तो वहां के सरपंच बहादुर सिंह सौंधिया की मां शांति बाई ने गाँव में हो रही रिश्तेदारी के चलते वर्षा के परिजन को अपने घर बुलाया। इस दौरान शांति बाई को पता चला कि आर्थिक तंगी के कारण वह अपनी बेटी की शादी गायत्री मंदिर में कराने वाले है। इस पर शांति बाई ने उससे कहा कि मैं वर्षा को बेटी बनाकर अपने घर से विदा करना चाहती हूं। जब शांति बाई ने अपने फैसले के बारे में अपने सरपंच पुत्र को बताया तो उन्होंने भी वर्षा को धर्म बहन बनाकर धूमधाम से विवाह करने का प्रस्ताव दिया।
इसके बाद सरपंच बहादुर सिंह ने शादी का पूरा जिम्मा उठा लिया। आमंत्रण पत्रिका में वर्षा के पिता के नाम के बाद धर्म पिता के रूप में अपने पिता स्व। लक्ष्मीनारायण सौंधिया का नाम लिखवाया। खुद का नाम धर्म भाई के रूप में लिखा। वर्षा की शादी की रस्में भी सरपंच के बड़े घर में ही निभाई गई। बहादुर सिंह ने ही दुल्हन का बेटी की तरह कन्यादान किया। जो परिवार अपनी बेटी की शादी मंदिर में एक दर्जन लोगों की मौजूदगी में करना चाहता था। उस बेटी की शादी में पूरा गांव ही नहीं, दूर-दूर से करीब चार हजार मेहमान पहुंच गए। इतने लोगों की खातिरदारी भी हुई। यह नजारा देख हर कोई खुश था।
सरपंच बहादुर सिंह सौंधिया कहते हैं कि मेरी माताजी ने कहा था कि मैं बेटी के रूप में अपने घर से विदा करना चाहती हूं। मेरा बेटा धर्म बहन बनाकर बेटी को विदा करे। ईश्वर ने इस लायक बनाया।
