बैतूल। छिंदवाड़ा और नागपुर से पैदल चलकर खंडवा की तरफ लौट रहे करीब 27 मजदूरों को बैतूल पुलिस ने इंदौर मार्ग पर भडुस गांव में रोक लिया। पुलिस ने मजदूरों के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और सभी लोगों को भरपेट भोजन कराया। इसके बाद बस की व्यवस्था कर उन्हें उनके घरों की तरफ रवाना किया। बैतूल पुलिस की इस दरियादिली को देख मजदूर भी भावुक हो गए और पुलिस के पैर छूकर, हाथ जोड़कर धन्यवाद किया।
दरअसल कोरोना वायरस के कारण देश में हुए लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी के लिए गए मजदूरों की घर वापसी मुश्किल हो गई है। रेल-बस बंद होने के कारण तमाम मजदूर तो पैदल ही निकल पड़े हैं। ऐसे ही करीब 27 मजदूर छिंदवाड़ा और नागपुर से 350 किलोमिटर पैदल चलकर खंडवा की तरफ जा रहे थे।
बैतूल पुलिस को जैसे ही इस बात की सूचना मिली कि 100 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलकर आ रहे मजदूर इंदौर मार्ग की तरफ जा रहे है तो उन्होंने मजदूरों को भडुस गांव के पास रोका। इसके बाद पुलिस ने सभी मजदूरों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और सभी लोगो को भरपेट भोजन कराया। इसके बाद पुलिस ने बस की व्यवस्था करवाई और सभी मजदूरों को बसों में बैठाकर खंडवा के लिए रवाना किया।
पुलिस ने बताया कि शनिवार की शाम को कोतवाली पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग पैदल चलकर खंडवा जा रहे है। तब टीआई राजेन्द्र धुर्वे अपनी टीम के साथ ग्राम भडूस के पास पँहुचे और इन लोगो से पूछताछ की। तब इन मजदूरों ने कहा कि वे नागपुर ओर छिंदवाड़ा से पैदल चलकर आ रहे है, दो दिनों से भूखे है। कोतवाली पुलिस ने भडूस के पास मानकर ढाबे को खुलवाया और इन सभी लोगो को भरपेट भोजन कराया।
इसके बाद कोतवाली टीआई ने इन सभी लोगो को उनके घर पंहुचाने की व्यवस्था करवाई। टीआई ने एसडीएम और जिला परिवहन अधिकारी से बात की और एक बस का इंतजाम किया और सभी मजदूरों को बस में बैठाकर उनके घरों के लिए रवाना किया। पुलिस की इस दरियादिली से खुश होकर इन मजदूरों ने पुलिस के पैर छूकर हाथ जोड़कर धन्यवाद किया।
छिंदवाड़ा से पैदल चलकर आ रहे सदाशिव ने बताया कि हम तो पैदल ही खंडवा जा रहे थे। भूखे-प्यासे रास्ते मे कुछ भी खाने-पीने को नही मिला। मगर बैतूल पँहुचते ही हमे भगवान के रूप में पुलिस मिली और उन्होंने हमें भरपेट भोजन कराया और बस में बैठाकर हमे घर भेज रहे है। हम सभी लोग बैतूल पुलिस को सलाम करते है और उन्हें धन्यवाद देते है।
