इंदौर। इन दिनों इंदौर की सडकों पर आवारा कुत्तों का आतंक देखा जा रहा हैं। जरुरी काम से बाहर जा रहे लोग कुत्तों से परेशान हैं। कुत्तों ने मुख्य बाजारों, चौराहों, मोहल्लों, गलियों, कालोनियों सभी जगह अपना बसेरा बना लिया है। यह पास से गुजरने वाले दोपहिया वाहनों के पीछे दौड़ लगा देते हैं। इससे हमेशा दुर्घटना का अंदेशा बना रहता हैं। वहीँ नगर निगम की ओर से भी कुत्तों के आतंक से लोगों को निजात दिलाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।
दरअसल कोरोना वायरस के कारण इन दिनों लोगों ने खुद को घरों में कैद कर लिया है तो सड़कों पर कुत्तों ने अपना आतंक मचाना शुरू कर दिया है। सुबह से रात 9 बजे तक तो पुलिस की तैनाती, अफसरों की गाड़ियां और कुछ लोगों की आवाजाही नजर आ जाती है, लेकिन रात 9 बजे बाद शहर की सड़के वीरान हो जाती हैं। दूर-दूर तक एक व्यक्ति भी नजर नहीं आता है।
रात में जब सड़को पर सन्नाटा पसार जाता हैं तो आवारा कुत्तों का आतंक शुरू हो जाता है। इन कुत्तों का कोई ठिकाना नहीं है कि कब किसी बाइक चालक को भौंकते हुए दौड़ा दे। वैसे तो शहर पूरी तरह लॉकडाउन हैं लेकिन रात में पुलिस वाले और नाइट ड्यूटी करके लौटने वाले प्राइवेट या सरकारी कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही है। कुत्ते सडकों पर झुंड बनाकर बैठ जाते हैं और जैसे ही कोई टू व्हीलर गुजरता है, उसके पीछे दौड़ लगा देते हैं। इससे चालक भी डर जाता है। इससे हमेशा किसी हादसे का डर बना रहता है।
कुत्तों का इतना आतंक होने के बाद भी नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लॉकडाउन के कारण लोग अपने घरों में हैं। ऐसे में नगर निगम के पास आवारा कुत्तों को पकड़ने का यह सबसे अच्छा मौका है। सुनसान सड़क पर निगम का अमला बहुत अच्छी तरह से घेराबंदी करके इन आवारा कुत्तों की धरपकड़ कर सकता है। निगम रात में अभियान चलाकर लोगों को कुत्तों के आतंक से छुटकारा दिला सकता है। जिस तरह से निगम ने शहर से आवारा पशुओं और आवारा सुअरों को शहर से बाहर किया है। उसी प्रकार आवारा कुत्तों का भी शहर से सफाया कर देना चाहिए।
