श्योपुर। कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन ने गांवों को कई दशक पीछे पहुंचा दिया हैं। कई गांवों में लोगों ने सालों पहले गायब हो चुकी हाथ की चक्की को वापस निकाल लिया है। महिलाएं इन्ही चक्कियों से गेंहू और दालें पीस रही हैं।
लॉकडाउन का असर कारोबारियों और व्यापारियों पर ही नहीं बल्कि किसानों और खेतिहरों पर भी पड़ रहा हैं। हाल यह है कि लॉकडाउन के कारण इलेक्ट्रिक चक्कियां बंद हो गई हैं तो ग्रामीणों ने सालों से घर के किसी कोने में रखी हुई हाथ की चक्की को वापस निकाल लिया हैं। इलेक्ट्रिक चक्कियों के कारण सालों पहले से लोगों ने इनका उपयोग करना छोड़ दिया था। लेकिन लॉकडाउन में ग्रामीण महिलाएं हाथ की चक्की से ही गेंहू और दालें पीस रही हैं।
दूसरी लॉकडाउन के कारण दूध का वितरण नहीं पा रहा हैं। किसान मवेशियों का दूध लेकर शहर नहीं जा पा रहा हैं। लॉकडाउन के कारण मिठाइयाँ, मावा, पनीर आदि के प्लांट बंद होने से दूध की खपत भी कम हो गई हैं। ऐसे में किसानों ने मवेशियों को दूध पिलाना शुरू कर दिया है। गांवों में हजारों लीटर दूध गायों को पिलाया जा रहा है। कई जगह दूध बांटा भी जा रहा हैं।
