आगर-मालवा। प्रदेश का किसान इन दिनों यूरिया संकट से जूझ रहा है। घंटों लाइन में खड़ा रहने के बाद भी किसानों को यूरिया नहीं मिल रहा है। ऐसे में किसान यूरिया के लिए लाइन में घंटों खड़े होने से निजात पाने के लिए नया तरीका अपना रहे हैं। किसानों ने अपनी जगह जमीन पर अपने आधार कार्ड और पावती रखकर लाइन लगा दी है। इससे किसानों को घंटों में लाइन में खड़े रहने से राहत मिल रही है। हालाँकि किसानों के इस जुगाड़ ने सिस्टम पर कई तरह के सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
दरअसल मध्यप्रदेश में खाद्य संकट किसी से छुपा नहीं है। किसानों को भी कई घंटों इंतजार करने के बाद कुछ खास मिलने की उम्मीदें लगी रहती है। ऐसे में आगर-मालवा में किसानों ने आधार कार्ड और पावती की लाइन लगाई है। इस लाइन लगाने के पीछे मूल कारण है कि किसान आखिर कब तक खड़ा रहकर अपनी बारी का इंतजार करें। किसानों को यूरिया कब मिलेगा इसका कुछ पता नहीं है। इस कारण किसानों ने अपने अपने आधार कार्ड और पावती जमीन पर रख दी है।
किसान का कहना है कि, ‘हम कई दिन से आ रहे हैं मगर खाद नहीं मिल रही है फसलें खराब हो रही है। वहीँ अन्य किसान का कहना है कि, ‘हम यहां 7:00 बजे से हैं खाद मिलने के लिए और फिर हमें चाय पीने या कहीं जाना होता है तो हमने इस तरह से आधार कार्ड और पार्टी की फोटो कॉपी से लाइन लगा दी है।’
किसानों के इस अद्भुत तरीके ने उनको थोड़ी राहत जरुर पहुंचाई है लेकिन साथ ही कमलनाथ सरकार के सिस्टम पर सवालिया निशान भी खड़े कर दिए है। आखिर कब तक किसानों को अपने आधार कार्ड को जमीन पर रखकर लाइन बनाना पड़ेगी? क्या किसानों को अब अपने जमीनों की प्रतियां इस तरह जमीन पर रखकर उनकी कतार बनाना पड़ेगी या किसान अब पत्थरों पर अपना नाम लिखकर उसके पास बैठ जाएगा और इंतजार करेगा कि कब खाद मिलेगी? कब उसका नंबर आएगा? और कब अब वह अपनी बर्बाद होती फसल को बचाने में कामयाब होगा?
