नीमच। जिस बच्ची को उसकी माँ ने पैदा होने के मात्र 24 घंटे के अंदर ही कचरे के ढेर में रोता बिलखता छोड़ दिया था। अब वह बच्ची सात समंदर पार अमेरिका में किसी की सुनी गोद में खुशियाँ भरने जा रही है। नीमच के इंदिरा नगर स्थित वात्सल्य गृह रह रही बच्ची को अमेरिका के एक दंपत्ति ने गोद लिया है। बच्ची को गोद लेने की प्रकिया पूरी हो गई है। अमेरिकी दम्पत्ति बच्ची को लेकर नीमच से दिल्ली पहुंचें। दिल्ली में कुछ कागजी कार्रवाई के बाद वह बच्ची को लेकर अमेरिका पहुचेंगे।
दरअसल करीब 22 माह पूर्व मंदसौर के एक सुनसान इलाके में कचरे के ढेर में रोती हुई एक दिन की बच्ची पर जब राहगीरों की नजर पड़ी तो उनका दिल भी पसीज गया। राहगीरों ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। बच्ची उस समय मरणासन्न अवस्था में थी, लेकिन अस्पताल में हुई देखरेख से वह फिर से जी उठी। बच्ची के ठीक होने के बाद उसे नीमच के इंदिरा नगर स्थित वात्सल्य गृह को सौंप दिया। जहां पर निराश्रित अनाथ बच्चों को पोषित किया जाता है। हालाँकि बच्ची कुपोषण का शिकार थी। इस कारण लम्बे समय तक उसका इलाज किया गया।
कुछ महीनों पहले अमेरिकी दम्पत्ति माइकल हेंकोक और एरिना मेगन को भारत सरकार की वेबसाइट “कारा” के जरिये बच्ची के बारे में पता चला। उन्होंने सम्पर्क कर बेटी को गोद लेने की इच्छा जताई। बात आगे बढ़ी तो उन्हें एक महीने पहले नीमच बुलाया गया। यहाँ आकर अमेरिकी दम्पत्ति बच्ची से मिला और गोद लेने की जरूरी औपचारिकताओं के लिए आवेदन किया। इस प्रक्रिया में उन्हें एक माह बाद पुनः नीमच आने का समय दिया गया।
माइकल हेंकोक और एरिना मेगन गुरुवार को वापस नीमच पहुंचे। यहाँ न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद उन्हें वात्सल्य गृह की प्रभारी उषा गुप्ता द्वारा गोद सौंप दिया गया। जब बच्ची को अमेरिकी दम्पत्ति सौंपा जा रहा था उस समय वहां मौजूद हरेक की आंखें नम थी। वात्सल्य गृह में बच्ची का नाम इशिता रखा गया था। बच्ची के नए माता-पिता ने उसका नाम ‘मिली’ रखा है। अपने साथ नई संतान को पाकर माइकल और एरीना की खुशी उनके चेहरे से साफ झलक रही थी।
बच्ची को गोद लेने के बाद माइकल हेंकोक ने कहा कि, मैं अमेरिका के मिसीसिपी की यूनिवर्सिटी में काम करता हूँ। हम एक बच्चा गोद लेना चाहते थे, जिसके लिए आवेदन कर रखा था। इस बच्ची का नया नाम मिली रखा है, हम इसे पाकर बहुत खुश हैं। वहीँ बच्ची की नई माँ एरिना मेगन ने कहा कि, यह बच्ची बहुत प्यारी है। हमारे कई दोस्त इंडिया के है। हम बहुत खुश है। मैं भी नौकरी करती हूँ और यहाँ दूसरी बार आई हूं ।
वहीँ आश्रम संचालिका उषा गुप्ता ने बताया कि यह बच्ची हमें कचरे के ढेर से मिली थी। यह प्रीमेच्योर बालिका थी जिसे जन्म लिए 24 घंटे हुए थे। हमें उम्मीद नहीं थी कि बच जाएगी, 13 दिन तक हॉस्पिटल में एडमिट रहने के बाद ये हमारे आश्रम में आई थी। अब यह 21 माह से ऊपर हो गई है, ये थोड़ी बीमार थी तो भारत में इसे कोई नही ले रहा था। अब ये शासन के माध्यम से अमेरिका जा रही हैं। शासन इसकी पूरी मॉनिटरिंग करेगा। बच्ची अच्छे परिवार में जा रही है। इसके माता पिता भी अच्छी नौकरी में है। हाल ही एक बच्चा यहां से यूरोप भी गया है। बच्ची के जाने का दुःख तो है लेकिन खुशी इस बात की है कि इस बच्ची का अच्छा भविष्य बन जाएगा।
