सीहोर। आज के डिजीटल दौर में जब लोगों तक सूचनाएं पहुँचाने के लिए व्हाट्सएप और फोन का इस्तेमाल किया जाता है। वहीँ प्रदेश का एक नगर ऐसा भी है जहाँ आज भी राजघराने की व्यवस्था लागू है। यहाँ आज भी लोगों तक सूचना पहुँचाने के लिए एक व्यक्ति साइकिल पर माइक बांधकर लोगों को सूचना देता है।
“अत्यंत दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि” जैसे ही ये लफ्ज़ कानों पर पड़ते हैं। हर कोई अपना चलता काम रोककर कान खड़े कर दौड़ने लगता है घर के पहले दरवाज़े की तरफ़। सायकल पर छोटा सा माइक लेकर एक शख्स शहर के चौक-चौराहों और गलियों में जब देखा जाने लगे तो हर कोई उसकी तरफ़ अपना सारा काम रोककर टकटकी लगाकर देखने लगता है और बड़ी संजीदगी से उसे सुनने की कोशिश करता है। सूचना होती है कि शहर में आज किसकी मृत्यु हुई है और उस मृत देह का अंतिम संस्कार कब होगा।
आज दुनिया भले ही अत्याधुनिक हो गई हो, तकनीक ने मानव को लाख विकसित कर दिया हो लेकिन सीहोर जिले के आष्टा का देसीपन आज भी बरकरार है। शहर में जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसकी सूचना उसी पुराने और देसी अंदाज़ में दी जाती है, जैसे पुराने ज़माने में बड़े शहरों में दी जाती थी। सायकल पर एक व्यक्ति माइक बांधकर शहर के चौक – चौराहों, प्रमुख गली और मोहल्लों में मृत व्यक्ति और उसके दाह संस्कार की सूचना देता है। उस व्यक्ति की आवाज़ सुनकर हर कोई अपना ज़रूरी काम छोड़कर वह सूचना सुनना नहीं भूलता जिसमें सम्बन्धित मृत व्यक्ति की जानकारी होती है ।
आष्टा नगर में यह व्यवस्था शमशान घाट समिति द्वारा इज़ाद की गई है। हालांकि, वक्त बदलते ही अब यह पारमार्थिक कार्य भी व्यावसायिक हो गया है। पहले समिति द्वारा इस कार्य के लिए एक व्यक्ति नियुक्त किया था लेकिन अब शहर में कई लोग इस तरह का “ऐलान” करते हैं। इस व्यवस्था को शहर में “ऐलान” कहा जाता है।
व्यवस्था कुछ ऐसी रहती है कि जिस भी व्यक्ति के घर किसी परिजन या सम्बन्धी की मृत्यु होती है, वह ऐलान वाले व्यक्ति को बुलाकर सम्बन्धित व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया का नाम और मृत व्यक्ति से सम्बन्ध, उसके घर का पता तथा अंतिम यात्रा का समय बताया जाता है । ऐलान करने वाला व्यक्ति आवश्यक जानकारी लेकर सायकल पर ही मृत व्यक्ति तथा उसके परिजनों के सम्बन्धियों के घरों/प्रमुख मोहल्लों तथा नगर के चौक व चौराहों पर यह सूचना माइक के जरिए देता है, जिसे सुनकर नगर के लोग मृत व्यक्ति की अंतिम यात्रा में शामिल होते हैं।
आष्टा नगर में देसी तरीके से सूचना का यह माध्यम चर्चा का विषय इसलिए भी है क्योंकि आधुनिक युग में राजघराने के समय उपयोग की जाने वाली यह व्यवस्था मालवा के इस कस्बे में आज भी बरकरार है।
