May 10, 2026

बदहाल शिक्षा व्यवस्था, तबेलों और झोपड़ों में संचालित हो रहे स्कूल

बड़वानी। प्रदेश में भले ही सरकार बदल गई लेकिन बड़वानी जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था नहीं बदली। बड़वानी जिले की शिक्षा व्यवस्था की हालत इतनी खराब है कि कई जगह खुले आसमान के नीचे स्कूल संचालित किए जा रहे हैं तो कहीं जानवरों को तबेलों में और झोपड़ों में स्कूल चल रहे हैं। कंपकंपाती सर्दी हो या फिर गर्मियों में लू के थपेड़े, बच्चे ऐसे ही खुले में आसमान के नीचे पढ़ाई करने पर मजबूर हैं। बारिश में तो हालत और भी ख़राब हो जाते हैं बच्चों को पानी में भीगना पड़ता है। झोपड़ियों और खुले में स्कूल एक-दो नहीं बल्कि पांच से छह वर्षों से संचालित किए जा रहे हैं लेकिन इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं हैं।

देश के संविधान में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार बच्चों का मौलिक अधिकार है। लेकिन अपने इस मौलिक अधिकार के लिए भी बच्चों को कितना संघर्ष करना पड़ता है बड़वानी की शिक्षा व्यवस्था इसका जीता-जागता उदाहरण है। बांस और इमली के पेड़ की छांव में बैठे बच्चे, बांस के पेड़ पर लगा बोर्ड और गिनती का चार्ट, यह नजारा है जिले के वेदपुरी ग्राम के प्राथमिक विद्यालय का। विद्यालय भवन न होने के कारण पहली से पांचवी तक के बच्चे पेड़ की छांव में पढ़ने पर मजबूर है। स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक और एक अतिथि शिक्षक इन बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बारिश होने पर पास के झोपड़े का मालिक इन्हें वहां आसरा दे देता हैं, लेकिन सर्दी और गर्मी के सितम में भी बच्चों को खुले आसमान के नीचे ही पढ़ाई करना पड़ती है। कई बार बच्चे बीमार भी हो जाते हैं। हैरान करने वाली बात है कि पिछले पांच सालों से स्कूल इसी तरह खुले आसमान के नीचे संचालित हो रहा है। लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है।

हैरान करने वाली बात है कि बड़वानी जिले का यह एकलौता स्कूल नहीं हैं जो खुले आसमान के नीचे संचालित हो रहा हो। जिले में ऐसे कई स्कूल है जिनका संचालन खुले आसमान के नीचे, जानवरों के तबले में या फिर झोपड़ी में किया जा रहा है। झोपड़ी में संचालित हो रहे स्कूलों की दीवारों में बड़े-बड़े छेद हैं। छत ऐसी हैं कि आसमान साफ तौर पर नजर आता है। बारिश होती हैं तो बच्चे भीग जाते हैं। सर्दियों में भी यही हालात है सर्द हवाएं चलने पर झोपड़ी की दीवारें उन्हें रोक नहीं पाती। कई बच्चे बीमार हो जाते हैं। जिले में कई स्कूल जानवरों के तबेले में संचालित हो रहे हैं। एक तरफ जानवर बंधे हैं और दूसरी तरफ बच्चे अपने उज्जवल भविष्य के लिए बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों के माता-पिता भी बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं। पालकों का कहना है कि बच्चे भीग जाते हैं, बीमार हो जाते हैं ऐसे में हम बच्चों को स्कूल कैसे भेजें।

जब जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारी से बातचीत की है तो उन्होंने खुद माना कि जिले में 28 स्कूल ऐसे हैं जिनके पास भवन नहीं हैं। इनमे से 22 प्राथमिक विद्यालय और 6 माध्यमिक विद्यालय है। कुछ स्कूल भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं और अधूरे बने हैं। उनका निर्माण कार्य बंद हो चुका है। इस कारण खुले आसमान में झोपड़ियों का सहारा लेकर स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। अधूरे भवन छोड़ने वाले ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड किए जाने की बात की जा रही है। बता दे कि जो भवन अभी शासन स्तर पर पास नहीं हुए उनके बारे में कोई बात नहीं हो रही है। अगर स्वीकृत नहीं हुए भवनों के साथ अधूरे पड़े स्कूल दोनों को जोड़ दिया जाए तो भवन विहीन स्कूलों का आंकड़ा सरकारी आंकड़े से कहीं ज्यादा सामने आएगा।

Written by XT Correspondent

bettilt giriş bettilt giriş bettilt pin up pinco pinco giriş bahsegel giriş bahsegel paribahis paribahis giriş casinomhub giriş rokubet giriş slotbey giriş marsbahis giriş casino siteleri