उमरिया। आजादी के बाद से ही बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की राह ताक रहे ग्रामीणों पर अब प्रशासन की नजर पड़ी है। मीडिया में गाँव की बदहाली की तस्वीरें सामने आने के बाद कलेक्टर खुद दो किलोमीटर पैदल चलकर गाँव पहुंचे और चौपाल लगाई। कलेक्टर ने ग्रामीणों की शिकायत को ध्यान से सुना और पांच अधिकारी कर्मचारियों को शोकॉज नोटिस भी थमाया।
दरअसल उमरिया जिले के सुदूर डिंडोरी जिले की सीमा पर विंध्य मैकल पर्वत श्रृंखला पर आबाद सेठानी गांव के लोग आज भी आदिम युग की जिन्दगी जीने पर मजबूर है। आजादी के इतने सालों बाद भी ग्रामीण बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बीते दिनों जब यह गाँव मीडिया की सुर्ख़ियों में आया तो कलेक्टर खुद गाँव पहुंचे और चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएँ सुनी।
कलेक्टर ने ग्रामीणों की शिकायत पर हल्के के पटवारी, आरआई, ग्राम पंचायत सचिव, एसडीओ, पीएचई एवं एनआरएलएम के प्रभारी को योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही पाए जाने पर ग्रामीणों के बीच ही शोकॉज नोटिस थमाने के निर्देश दिए। इस दौरान कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को कार्ययोजना बनाकर सेठानी गांव में जल्द से जल्द मूलभूत सुविधा मुहैया कराए जाने का आदेश दिया।
कलेक्टर को अपने बीच पाकर सेठानी गांव के बाशिंदे भी काफी खुश नजर आए। आजादी के बाद पहली बार कलेक्टर को अपने बीच पाकर उन्हें उम्मीद जगी है कि अब गाँव का विकास हो सकेगा। इसके अलावा ग्रामीणों ने पत्रकारों को भी गाँव की बदहाली का मुद्दा उठाने के लिए धन्यवाद दिया।
सुविधाओं के नाम पर बदहाल सेठानी गांव में कलेक्टर की चौपाल ने ग्रामीणों मन में गांव की तरक्की के सपनो का पंख दे दिया है। देखना होगा कि 72 साल से विकास से दूर सेठानी गांव में कलेक्टर का भ्रमण कितना विकास कर पाता है।
