होशंगाबाद। प्रदेश के एक किसान ने अपनी गाय का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर मानवता की नई मिसाल पेश की है। समाज को गोवंश का संरक्षण देने के उद्देश्य से किसान ने पूरे गाजे-बाजे के साथ अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। गाय की शव यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
दरअसल होशंगाबाद जिले की डोलरिया तहसील के गाँव मिसरोद में रहने वाले किसान रामेश्वर गौर की गाय की मौत हो गई थी। रामेश्वर ने गाय की मौत पर अर्थी सजाकर भजन- कीर्तन करते हुए शव यात्रा निकाली। शव यात्रा के बाद गाय को अपने ही खेत में विधि-विधान से समाधिस्थ किया।
किसान का कहना है कि जन्म देने वाली माँ दो साल तक दूध पिलाती है लेकिन उनकी इस पालतू गाय ने उन्हें 18 साल तक दूध पिलाया है। लोगों को गायों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। इससे पालतू गोवंश दर-दर ठोकरे खाते हैं। सड़कों पर आकर मवेशी दुर्घटना या पन्नी खाकर असमय मौत का शिकार हो जाते हैं। हम सभी को गौवंश का संरक्षण कर अपने घर खेत और गोशाला में गाय की सेवा करनी चाहिए। किसान का कहना है कि दूध और गोबर औषधि का काम करते हैं। गाय की पीठ पर हाथ फेरने से कई प्रकार की बीमारियां भी दूर होती है।
