ग्वालियर। सरकारे विकास के बड़े-बड़े दावे करे लेकिन प्रदेश के कई गाँव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। एक बार फिर इसकी बानगी देखने को मिली जब एक बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार करने के लिए परिजनों को नदी के तेज बहाव से शव यात्रा निकालना पड़ी।
विकास कार्यों के दावों की पोल खोलती यह तस्वीरें ग्वालियर जिले की भितरवार विधानसभा के अंतर्गत आने वाले पैरा गाँव की है। पैरा गाँव में विकास की बाते बेईमानी सी नजर आती है। बीते दिनों गाँव में एक बुजुर्ग महिला का बीमारी के चलते निधन हो गया था। गाँव के पास एक मुक्तिधाम बना है, लेकिन बीच में नदी आती है। नदी पर कोई पुल न बना होने के कारण परिजनों को नदी के तेज बहाव में से ही शव यात्रा निकालना पड़ी।
गौर करने वाली बात यह है कि गांव में जब भी किसी की मौत होती है तो उस व्यक्ति के परिजन अंतिम संस्कार के लिए इसी पानी के रास्ते से हो कर शव यात्रा निकालते हैं। मुक्तिधाम जाने का यही एक मात्र रास्ता है। ग्रामवासियों को आए दिन भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। अभी नदी में पानी कम है लेकिन जब बरसात में किसी का निधन होता है तो गाँव के लोग किसी खेत में उसका अंतिम संस्कार करते हैं।
कहीं ना कहीं प्रशासन पर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि ऐसी जगह मुक्तिधाम बनाने का क्या मतलब जो किसी ग्रामवासियों के उपयोग में ना आता हो। यह देख कहीं ना कहीं आला अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है।
