झाबुआ। लॉकडाउन में पलायन कर अपने गाँव लौटें मजदूरों की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। गाँव लौटने के बाद मजदूरों के सामने रोजगार का संकट आ खड़ा हुआ है। रोजगार नहीं होने के कारण कई परिवारों के सामने भूखे मरने की नौबत आ खड़ी हुई है।
दरअसल लॉकडाउन के चलते बाहर मजदूरी करने गए लोग अब वापस अपने गाँव लौट आए हैं। कई किलोमीटर पैदल चलकर, साइकिल चलाकर या अन्य किसी तरह से मजदूर अपने-अपने गाँव तो पहुंच गए लेकिन गाँव पहुंचकर भी उनकी परेशानियां खत्म होने के नाम नहीं ले रही है। गावों में मजदूरों के सामने फिर से वहीँ संकट आ खड़ा हुआ है, जिसके लिए उन्हें अपना गांव छोड़ना पड़ा था यानी रोजगार का।
झाबुआ जिले की चार पंचायतों में ही करीब 1500 मजदूर वापस लौट आए हैं। गुजरात से लौटे इन मजदूरो का कहना है कि दिन-रात मेहनत करके इन्होने जो पैसे बचाए थे वह रास्ते में ही खर्च हो गए है। अब गांव में खाने के लाले पड़े है। क्षेत्र की रहने वाली रमिला बाई के घर के पांच सदस्य वापस घर लौट आए हैं, लेकिन गाँव में रोजगार नहीं होने से इनके सामने आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। इसी तरह रामचन्द्र नाम का मजदूर अहमदाबाद में मुसीपल कार्पोरेशन में कचरा गाड़ी चलाता था। लॉकडाउन के कारण वहां से वेतन नहीं मिला और गाँव में अब कोई काम नहीं है।
