आगर-मालवा। शहर में शव को शमशान तक ले जाने के लिए लोगो को कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। बारिश और गर्मी में तो परेशानी और भी बढ़ जाती थी। ऐसे में लोगों को इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए शहर का एक समाजसेवी आगे आया और खुद के खर्च पर शव वाहन का निर्माण करवाया।
आगर-मालवा के लोगों की जिस समस्या को जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारों ने नहीं समझा उसे शहर के एक समाजसेवी गोपाल सोनी ने समझा और लोगों को वर्षों पुरानी समस्या से छुटकारा दिलाया। दरअसल आगर मालवा जिला बनने के बाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ती आबादी के चलते नगरीय सीमा भी फैलती जा रही है। ऐसे में किसी शव को शमशान तक ले जाने के लिए शवयात्रा में शामिल लोगो को पैदल लंबी दूरी तय करना पड़ती थी। बारिश और गर्मी में पैदल चलने में परेशानी ज्यादा बढ़ जाती थी। इस परेशानी को अभी तक कोई भी जनप्रतिनिधि और जवाबदारों ने दूर करने की कोशिश नहीं कि तो समाजसेवी गोपाल सोनी आगे आ गए।
समाजसेवी गोपाल सोनी ने एक संस्था बनाई। इस संस्था के माध्यम से निजी तौर पर एक रथ के रूप में शव वाहन को डिजाइन कराया है। इस रथ में महाभारत की तर्ज पर आगे घोड़े डिजाइन कराए गए है। सारथी के रूप में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति लगाई गई है। गोपाल सोनी रथ को अब खुद के खर्च पर आम लोगो को फोन पर नि:शुल्क उपलब्ध करा रहे है। इस शव वाहन में डीजल और ड्राइवर सहित होने वाला खर्च वे स्वयं ही वहन करते है।
समाजसेवी गोपाल सोनी ने बताया कि इस शव वाहन को लगभग छह लाख रुपए की कीमत से तैयार किया गया है। शव वाहन लोगो को आसानी से उपलब्ध हो जाए इसके लिए उन्होंने जगह-जगह अपने मोबाइल नंबर के बोर्ड भी लगाए है। फ़ोन लगाने पर तत्काल वाहन तय स्थान पर पहुँच जाता है। गोपाल सोनी की इस पहल के बाद पूरे जिले में अब यह एक मात्र ही शव वाहन जिला मुख्यालय पर उपलब्ध है।
लगभग दो माह से यह वाहन आम लोगो को आसानी से उपलब्ध हो रहा है। साथ ही सोनी और उनकी संस्था द्वारा लावारिस लाश के साथ-साथ अत्यंत गरीब लोगों के दाह संस्कार की व्यवस्था भी उनके द्वारा की जाती है।
