मंदसौर। जहाँ एक तरफ महिलाओं के साथ हो रहे बलात्कार के मामलों को लेकर पूरे देश में गुस्सा है। वहीँ प्रदेश में एक नाबालिग से गैंगरेप का मामला 19 महीनों से सिर्फ इसलिए फ़ास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट में अटका रहा क्यों कि डीएनए रिपोर्ट आने में ही लगभग 18 महीने लग गए। रिपोर्ट आने के बाद अब जाकर आरोपियों के बयान हुए है।
दरअसल मंदसौर जिले के सीतामऊ थाना क्षेत्र में 15 मई 2018 को एक नाबालिग बच्ची के साथ पांच लोगों ने गैंगरेप किया था। बच्ची दसवीं का रिजल्ट लेने स्कूल गई थी। इस दौरान आरोपियों ने उसका अपहरण कर वारदात को अंजाम दिया। मामला जब पुलिस के पास पहुंचा तो पुलिस ने पॉक्सो एक्ट तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।
पीड़ित पक्ष को उम्मीद थी कि तीन से चार महीने में उन्हें न्याय मिल जाएगा, लेकिन पिछले 18 महीनों से पीड़ित पक्ष सिर्फ इस बात के चक्कर काटता रहा की डीएनए रिपोर्ट जल्द से जल्द आ जाए। सागर की फॉरेंसिक लैब में गई जिस रिपोर्ट को 10 से 15 दिन में आना था उसी को आते-आते लगभग 18 महीने लग गए।
पीड़िता के भाई का कहना है कि उन्हें तीन-चार महीने के अंदर न्याय मिलने की उम्मीद थी लेकिन डीएनए रिपोर्ट आने में कई महीने लग गए। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि ऐसी व्यवस्था की जाए जिसमें नाबालिगों से गैंगरेप मामले में डीएनए रिपोर्ट तुरंत प्रभाव से उपलब्ध करवाई जाए। ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके। इसके अलावा पीड़िता के भाई ने बताया कि उसकी बहन के साथ गैंग रेप होने के बावजूद आरोपी पक्ष की महिलाओं ने गांव में ही मारपीट भी की थी। इसकी शिकायत भी सीतामऊ थाने में दर्ज करवाई थी, जिसका केस भी चल रहा है।
बता दे कि मंदसौर फास्ट ट्रैक कोर्ट में एक महीने में भी नाबालिगों के मामलों में कड़े फैसले दिए हैं। लेकिन अगर डीएनए रिपोर्ट आने में ही 18 महीने लग जाएँगे तो कोर्ट फैसला कैसे दे सकता है? बड़ा सवाल यह उठता है कि नाबालिगों से गैंग रेप मामलों में फॉरेंसिक लैब डीएनए रिपोर्ट भेजने में यदि ऐसे ही समय लगाती रही तो, निश्चित तौर पर फरियादी पक्ष को न्याय मिलने में काफी समय लगता रहेगा। साथ ही पीड़ित पक्ष को भी किसी न किसी खतरे की आशंका में फैसले का इंतजार करता रहना पड़ेगा।
इस मामले एडीपीओ नितेश कृष्णन का कहना है कि यह मामला सिर्फ डीएनए रिपोर्ट के कारण लंबित था जिसमें डीएनए रिपोर्ट आने के बाद अब मुलजिमों के बयान हो रहे हैं। असल में सागर की जिस फॉरेंसिक लैब में डीएनए रिपोर्ट के लिए सैंपल भेजा जाता है वहां से रिपोर्ट सही समय पर नहीं आ पाती जिसकी वजह से मामले में देरी हो जाती है। यदि समय पर रिपोर्ट आ जाए तो इतनी दिक्कत ना होती। पॉक्सो एक्ट के मामलों में लगभग 4 महीनों के अंदर फैसला आ ही जाता है लेकिन इसमें डीएनए रिपोर्ट देरी से आई थी।
बता दे कि मध्यप्रदेश में फॉरेंसिक लैब से जुड़े सारे सैंपल सागर जाते हैं। यदि सरकार सागर की फॉरेंसिक लैब में घटित हुए अपराधों के प्रतिशत के हिसाब से स्टाफ में और ज्यादा नियुक्ति कर दे तो कहीं ना कहीं पीड़ित पक्ष या न्यायालय को किसी भी प्रकार की महत्वपूर्ण रिपोर्ट के लिए इतना इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
