उमरिया। उमरिया जिले के दर्जनों गाँव इन दिनों हाथियों के आतंक से दहशत में है। हाथियों ने किसानों की खलिहान में रखी सैकड़ों क्विंटल धान चौपट कर दी है। खेतों में बनी झोपड़ियों को तबाह कर दिया है। हालत यह हैं कि ग्रामीण हाथियों के आतंक से परेशान होकर गांव छोड़ने की बात करने लगे है। ग्रामीण हाथियों से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे है।
दरअसल 40 हाथियों के झुंड ने उमरिया जिले के महावन, गड्पुरी, परासी, मरदरी सहित दर्जनों गांव में आतंक मचा रखा है। हाथी दिन में जंगलों में छिप जाते हैं और शाम होते ही गांव की तरफ रुख करते हैं। हाथियों ने अब तक गांवों में सैकड़ों क्विंटल धान को स्वाहा कर दिया है। हाथी धान खाने के साथ धान से भरी बोरियों को भी अपने साथ उठा ले जाते है। हाथियों के आतंक से इलाके के ग्रामीण परेशान है। कई ग्रामीण खेती और गांव छोड़ने की बात करने लगे हैं।
हालाँकि कई किसान अभी भी अपने घरों में डटे हुए है। जंगली हाथियों को चकमा देने के लिए किसान बचाव के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। किसान वन कर्मियों के सहयोग से पटाखे व मशाल जलाकर हाथियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा किसान देशी नुस्खों से भी हाथियों के आतंक से बचाव करते देखे जा रहे है।
उड़ीसा होते हुए छत्तीसगढ़ के रास्ते बांधवगढ़ पहुंचे इन हाथियों ने साल भर पहले यंहा दस्तक दी थी। यहाँ आने के बाद से लगातार इलाके में उनका मूवमेंट बांधवगढ के आसपास ही रहा है लेकिन छिटपुट घटनाओं को छोड़ दे तो हाथियों का उग्र रूप अब सामने आया है। हाथियों की वजह से कई बार पर्यटन बंद करना पड़ा है। हालत यहाँ तक बिगड़ चुके है कि बांधवगढ से गुजरने वाले स्टेट हाइवे को रात के समय बंद रखा जाता है जिससे इलाके के सैकड़ो गांव का आवागमन प्रभावित होता है। पार्क प्रबंधन हाथियों की सतत निगरानी में तो जुटा है साथ ही अतिरिक्त सुरक्षा चौकसी भी बढ़ाई गई है लेकिन हाथी है कि जाने का नाम नही ले रहे।
