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हाई कोर्ट ने कहा मोबाइल रखने वाला हर व्यक्ति खुद को पत्रकार मान ही है। प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि आज के दौर में मोबाइल फोन और माइक्रोफोन लेकर कोई भी स्वयं को पत्रकार बताने लगता है, जबकि कई लोगों के पास न तो पत्रकारिता का आवश्यक प्रशिक्षण होता है और न ही उनके कार्यों की कोई स्पष्ट जवाबदेही होती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि समय की मांग है कि सरकार ऐसा प्रभावी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करे, जिससे एक ओर प्रेस की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे और दूसरी ओर फर्जी, गैर-जिम्मेदाराना तथा डराने-धमकाने वाली पत्रकारिता पर जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
अदालत की इस टिप्पणी ने डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को लेकर जवाबदेही तथा विश्वसनीयता की आवश्यकता पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
रील बाज़ भी पत्रकार
सोशल मीडिया पर रील डालने वाले भी खुद को पत्रकार बताते हैं। इनके पास न तो पत्रकारिता का ज्ञान होता है न पत्रकारिता की डिग्री न ही कभी प्रिंट मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने का अनुभव होता है। बस एक मोबाइल फोन ले लिया और रील डालना शुरू बन गए पत्रकार। इनकी हरकतों से वास्तविक मीडियाकर्मी और वास्तविक पत्रकारों को भी लोग इनकी तरह समझते हैं।
आरजे,इवेंट मैनेजर सोशल वर्कर करने वाले सब पत्रकार
शहर में कई आर जे(रेडियो जॉकी) सोशल वर्कर, इवेंट मैनेजर एक माइक ख़रीदकर मोबाइल से वीडियो बनाने कहीं भी पहुँच जाते हैं। फिर खुद तो मीडियाकर्मी या पत्रकार बताते हैं।
