मंदसौर। मंदसौर का एक गाँव ऐसा है जहाँ बड़े ही अनोखे तरीके दशहरा मनाया गया। भगवान राम और रावण की सेना के बीच परम्परागत और खतरनाक तरीके से युद्ध हुआ। दोनों ही सेनाओं ने एक-दूसरे पर आग के गुबार फेंके। यहाँ दशहरे पर रावण दहन नहीं बल्कि रावण का वध किया जाता है।
मंदसौर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर ग्राम धमनार में दशहरे पर मस्ती, रोमांच और खतरों भरा युद्ध हुआ। इसके लिए ग्रामीणों की दो टोलिया बनाई गई। एक टोली भगवान राम की तो दूसरी टोली रावण की। भगवान राम की सेना रावण का वध करने के लिए ऊपर चढ़ाई करती है। वहीँ रावण की सेना उन्हें रोकने का प्रयास करती है।
इसके लिए पुराने बांस के बने टोकरो और चारे के पुलिंदों को जलाया जाता है। इन जलते हुए आग के गुबार से दोनों सेना एक दूसरे पर वार करती है। आग के युद्ध में कई बार लोग जल भी जाते हैं। आग युद्ध के बाद राम की सेना रावण की प्रतिमा पर चढ़ने के प्रयास करती हैं। वहीँ रावण की सेना इन्हें रोकने की कोशिश करती हैं। एक घंटे तक युद्ध करने के बाद अंत में राम की सेना का एक व्यक्ति रावण के ऊपर चढ़ कर रावण के नाक पर मुक्का मारता है।
रावण के नाक पर मुक्का मारने का अर्थ होता है रावण के अहंकार को तोड़ना। इसे रावण का वध माना जाता है। दशहरा उत्सव की अनूठी परम्परा में युद्ध के दौरान कई लोग जख्मी भी हो जाते हैं। इसके लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तेद रहता है।
