छिंदवाड़ा। एक ऐसा शख्स जो बचपन से दिव्यांग है। ना तो उसके पैर काम करते हैं और ना ही हाथ। बावजूद इसके उसमें पढ़ाई का ऐसा जज़्बा हैं कि वह हर रोज कॉलेज पहुँच जाता है। इस काम में पिता अपने बेटे का भरपूर साथ देते है।
‘मंजिल उन्हें मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।’ यह पंक्तियाँ छिंदवाड़ा के रोहना कला गांव के रहने वाले कृष्णा साहू बिलकुल सटीक बैठती है। भले ही कृष्णा के हाथ पैर-काम नहीं करते हैं लेकिन उन पर पढ़ाई का जुनून सवार है। कृष्णा अभी BA की पढ़ाई कर रहा है। वह पढ़ लिख कर सिविल सर्विस में जाना चाहता है।
कृष्णा के सपने को पूरा करने के लिए उसके पिता तेजिलाल साहू पूरा साथ देते हैं। तेजिलाल रोजाना कृष्णा को रोहना कला से 10 किलोमीटर दूर कॉलेज लेकर आते हैं। वह अपनी बाइक पर बंधी प्लास्टिक चेयर पर कृष्णा को बैठाकर हर दिन कॉलेज पहुंचाते हैं। जब कृष्णा स्कूल में पढ़ते थे तब भी तेजिलाल ऐसा ही करते थे। तेजिलाल अपनी बाइक पर व्हील चेयर भी बांधकर कॉलेज लाते है ताकि कॉलेज पहुँचने के बाद कृष्णा को व्हीलचेयर की सहायता से कॉलेज के भीतर ले जाया जा सके।
तेजिलाल कहते हैं कि कृष्णा के लिए एक सहायक भी रखा है जो परीक्षा में कृष्णा के हिसाब से प्रश्न पत्र हल करता है।
कृष्णा साहू बताते हैं कि उन्हें सरकार की तरफ से ट्राईसाईकिल और व्हील चेयर मिली है। मुख्यमंत्री दिव्यांग प्रोत्साहन सहायता योजना की तरफ से स्कूटी मिलती है, जिसके लिए वे कई महीनों से कोशिश कर रहे है। पोर्टल नहीं खुलने की वजह से उनका आवेदन दर्ज नहीं हो रहा है। कृष्णा साहू का पढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का ऐसा जज्बा देखकर कोई भी उनके हौसले की तारीफ किए बिना नहीं रह पाता।
