खरगोन। इस समय पूरे देश में प्याज 100 रुपये किलो बिक रहा है। प्याज की आसमान छूती कीमतों के कारण गरीबो की थाली से प्याज गायब हो गया है। वहीँ प्याज किसान इसका लाभ लेने के लिए फसल को तय समय से पहले ही उखाड़कर बेच रहे हैं। किसानों को डर है कि सरकार द्वारा प्याज का निर्यात करने पर प्याज की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
खरगोन जिले के नागझिरी गाँव में प्याज उत्पादक किसान फसल पकने के 15 दिन पूर्व ही फसल को उखाड़ रहे हैं। वर्तमान में किसानों का थोक प्याज 70 से 80 रुपये किलो खरीदा जा रहा है। किसानों का मानना है कि अगर प्याज का भाव गिरता हैं तो उन्हें हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए किसान प्याज की फसल को पकने के 15 दिन पूर्व ही उखाड़ कर व्यापारियों को बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे है।
ग्राम नागझिरी के प्याज उत्पादक किसान राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि प्याज की फसल को 15 दिन पूर्व इसलिए निकाल रहे है ताकि बाजार में भाव अच्छा मिल सके। वहीँ एक किसान संजय कुशवाह का कहना है कि हमे पता चला है कि सरकार 10 दिसम्बर से प्याज का आयात करने वाली है। इसीलिए 150 की दिन की फसल को 15 दिन पूर्व ही निकालकर बाजार में अच्छे भाव में बेच रहे है। अभी 80 से 90 रुपये प्रति किलो के हिसाब से प्याज थोक भाव में बेच रहे है। प्याज का अगर आयात होता है तो सीधे प्याज की कीमतों में 20 रुपये तक कि गिरावट हो सकती है।
वहीँ प्याज की फसल को निकालने पहुंची महिला मजदूरों का कहना है कि अभी हमें काम नहीं मिल रहा था लेकिन प्याज की फसल को उखाड़ने के लिए हमें मजदूरी भी अच्छी मिल रही है। हम दिनभर खेतों में मजदूरी कर अपना पेट पालते है ऐसे में हम 100 रुपये किलो का प्याज भी खरीद नही सकते है। लेकिन अब मजबूरी में हमें आधे से एक किलो प्याज किसान दे रहे है।
