खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा में इंसानियत को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई हैं। यहां सरकारी सिस्टम की लापरवाही ने एक पिता को अपनी ही बेटी के शव को हाथों में लेकर भटकने पर मजबूर कर दिया। पिता बेटी के शव को हाथों में लेकर अस्पताल से थाने और थाने से पोस्टमार्टम रूम तक भटकता रहा, लेकिन न उसे स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया और ना ही शव वाहन।
मामला खंडवा जिले के आदिवासी बाहुल्य हरसूद इलाके की है। यहां के टिमरनी में एक बच्ची को साँप ने काट लिया था। बच्ची के परिजन उसे अचेत हालत में बाइक पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर पहुंचे। करीब 15 मिनट बाद जब डॉक्टर ने बच्ची को चेक किया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
बच्ची की मौत के बाद डॉक्टर ने परिजनों को थाने में जाकर सूचना देने की बात कही। सरकारी सिस्टम से अंजान परिजन शव को बाइक से लेकर थाने पहुँचे। थाने से उन्हें फिर पोस्टमार्टम करवाने के लिए अस्पताल भेजा गया। इस पर शव के साथ परिजन फिर अस्पताल आ गए।
यहाँ बीएमओ महेश जैन से शव वाहन या स्ट्रेचर देने की परिजनों ने गुजारिश की। लेकिन बीएमओ ने नियमों का हवाला देकर एम्बुलेंस वाहन देने से साफ मना कर दिया। यही नहीं बीएमओ ने आँसू बहाते परिजनों को घटना के लिए माँ-बाप को ही दोषी ठहरा दिया। साथ ही शव वाहन न होने की बात कही गई। स्ट्रेचर के अभाव में मजबूरीवश शव को पिता पोस्टमार्टम रूम तक अपने हाथों में उठाकर ले गए। घटना 20 जून की दोपहर की है।
पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए परिजन परेशान हो रहे थे तभी समाजसेवी नीलेश कौशल और स्थानीय लोगों ने वाहन का इंतज़ाम किया।
