आगर-मालवा। आपने अब तक मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे में इंसानों के लिए लंगर लगने के बारे में तो देखा सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी बेजुबान पक्षियों के लंगर के बारे में सुना है? शायद नहीं! लेकिन मध्य प्रदेश के आगर मालवा में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हर दिन हज़ारों पक्षियों का लंगर लगाते हैं।
इस नेक काम की शुरुआत 20 साल पहले आगर मालवा के रहने वाले मनोहर जैन ने की थी। उम्र के कारण अब उनका शरीर साथ नहीं देता तो उनके बेटे इस काम को आगे बड़ा रहे हैं। मनोहर का बेटा सुमित जैन रोजाना सुबह छह बजे अपने दोस्तों के साथ छत पर पहुँच जाता है और 1 क्विंटल दाना छत पर बिखेर देता है। ज्वार, मक्का, बाजरा जैसे दाने को देखकर कबूतरों और तोतो भीड़ छत पर जमा हो जाती हैं।
रोजाना पक्षियों के लिए करीब क्विंटल भर अनाज की व्यवस्था करने में सालाना लगभग तीन लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आता है। समाज सेवा से जुड़े लोगों द्वारा भी इस नेक काम के लिए दान दिया जाता है।
इंसानों का पेट भरने के लिए तो सरकार और सामाजिक संस्थाएं कई तरह की योजनाएं चलाती है लेकिन यहां बेजुबान पक्षियों के लिए दाने पानी का इंतजाम वो भी बिना किसी स्वार्थ के सराहनीय है।
