सिंगरौली। कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों के कारण वेंटिलेटर की कमी न पड़े, इसके लिए एक डॉक्टर ने नई तकनीक इजाद की है। इस तकनीक की सहायता से एक वेंटिलेटर से पांच मरीजों को एक साथ इलाज मिल सकेगा। दावा है कि आपातकालीन की स्थिति में वेंटिलेटर की कमी को दूर किया जा सकेगा।
दरअसल देश में कोरोना वायरस के मरीजों में तेजी से हो रहे इजाफे को देखते हुए कोयला कंपनी एनसीएल के मुख्य चिकित्सालय एनएचसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ पंकज कुमार ने यह नई खोज की है। उन्होंने बाकायदा इस तकनीकी का प्रदर्शन भी किया है। उन्होंने बताया कि संकट की घड़ी में इस तकनीक से देश में वेंटिलेटर की कमी नहीं होगी।
डॉ पंकज कुमार के अनुसार वेटिलेटर के इनहेलेशन और एक्सहेलेशन पोर्ट को दो अलग-अलग तांबे की नलियों से जोड़ा गया है। इस नली में पांच निकास बिंदु हैं। प्रत्येक रोगी का इनहेलेशन पोर्ट, कॉपर इनहेलेशन असेंबली से जुड़ा है जो वेंटिलेटर के इनहेलेशन पोर्ट से जुड़ता है। इसी तरह प्रत्येक रोगी की एक्सहेलेशन ट्यूब वेंटिलेटर के एक्सहेलेशन पोर्ट से जुड़ी है। यहीं पर वायरल व बैक्टीरियल फिल्टर को भी जोड़ा गया है, जिससे इंफेक्शन का खतरा न हो।
वेंटिलेटर को बैरोट्रामा और वॉल्यूमट्रामा से बचाने के उद्देश्य से दबाव नियंत्रण मोड में सेट किया गया है, जो रोगी की व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार कार्य करेगा। वेंटिलेटर प्रणाली के इस संशोधित स्वरूप से आपदा की स्थिति में कई कीमती जीवन को बचाया जा सकता है।
